Edited By jyoti choudhary,Updated: 01 Oct, 2026 02:44 PM

मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि भारत को घरेलू बचत का अधिक हिस्सा लंबे समय के पेंशन उत्पादों में लगाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि घरेलू बचत में पेंशन और बीमा परिसंपत्तियों की हिस्सेदारी...
नई दिल्लीः मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि भारत को घरेलू बचत का अधिक हिस्सा लंबे समय के पेंशन उत्पादों में लगाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि घरेलू बचत में पेंशन और बीमा परिसंपत्तियों की हिस्सेदारी अभी भी अपेक्षाकृत कम है।
NPS दिवस 2025-26 के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से संबोधित करते हुए नागेश्वरन ने कहा कि भारतीय परिवारों के बचत के तरीके में बदलाव आया है और बाजार से जुड़े निवेश में तेजी आई है। हालांकि, पेंशन बचत में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि भारतीय बचतकर्ता अब बाजार के जोखिम को स्वीकार करने के लिए पहले की तुलना में अधिक तैयार नजर आते हैं लेकिन लंबी अवधि के लिए बचत को प्रतिबद्ध करने की प्रवृत्ति अभी बड़े पैमाने पर विकसित नहीं हुई है।
इक्विटी और म्यूचुअल फंड में बढ़ी बचत
नागेश्वरन ने आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि घरेलू वार्षिक बचत में इक्विटी और म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी 2011-12 के करीब 2 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में लगभग 15 प्रतिशत हो गई है।
वहीं, बैंक जमा की हिस्सेदारी इसी अवधि में 58 प्रतिशत से अधिक से घटकर करीब 35 प्रतिशत रह गई। मासिक सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) निवेश भी 2016-17 के 4,000 करोड़ रुपए से कम से बढ़कर 2025-26 के पहले आठ महीनों में 28,000 करोड़ रुपए से अधिक हो गया।
हालांकि, 2018-19 से 2023-24 के बीच घरेलू बचत में पेंशन और बीमा परिसंपत्तियों की हिस्सेदारी में कोई खास बदलाव नहीं आया।
GDP के मुकाबले पेंशन परिसंपत्तियां कम
CEA ने बताया कि भारत की कुल पेंशन परिसंपत्तियां GDP के करीब 17 प्रतिशत के बराबर हैं, जबकि OECD के समकक्ष देशों में यह अनुपात कम से कम 80 प्रतिशत है। इससे भारत में पेंशन परिसंपत्तियों के विस्तार की बड़ी गुंजाइश का संकेत मिलता है। उन्होंने कहा कि पेंशन उत्पादों को आसान बनाना, उनकी पहुंच बढ़ाना और लोगों को बेहतर रिटायरमेंट इनकम समाधान उपलब्ध कराना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम होंगे।
UPI से मिल सकती है सीख
नागेश्वरन ने वित्तीय समावेशन के संदर्भ में UPI का उदाहरण देते हुए कहा कि तकनीक और सरल उत्पादों के जरिए लोगों को वित्तीय सेवाओं से जोड़ना संभव है।
उन्होंने कहा कि वित्तीय साक्षरता बढ़ने से पहले भी वित्तीय समावेशन संभव है। इसी दिशा में NPS में डिफॉल्ट स्कीम, मोबाइल फोन के जरिए छोटी रकम का योगदान और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध एजेंट जैसे विकल्प कवरेज बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने Tatkal NPS और Pension Sakhis जैसी पहलों का भी उल्लेख किया।
सिर्फ पेंशन कॉर्पस बनाना पर्याप्त नहीं
नागेश्वरन ने कहा कि रिटायरमेंट के लिए केवल पर्याप्त पेंशन कॉर्पस तैयार करना ही पूरी प्रक्रिया नहीं है। इसके बाद उस राशि को ऐसी नियमित आय में बदलना भी जरूरी है, जो व्यक्ति के जीवनभर चल सके और महंगाई के असर को भी ध्यान में रखे।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में रिटायरमेंट इनकम स्कीम, निकासी व्यवस्था और सुनिश्चित भुगतान जैसे मुद्दों पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।