भारत में संरचनात्मक रूप से जरूरत से अधिक विनिर्माण क्षमता नहीं: गोयल

Edited By Updated: 02 Oct, 2026 02:32 PM

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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि जी20 अध्यक्षता द्वारा चिन्हित क्षेत्रों में भारत में संरचनात्मक रूप से जरूरत से अधिक विनिर्माण क्षमता नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की विनिर्माण क्षमता घरेलू और वैश्विक, दोनों जरूरतों को पूरा...

नई दिल्लीः वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि जी20 अध्यक्षता द्वारा चिन्हित क्षेत्रों में भारत में संरचनात्मक रूप से जरूरत से अधिक विनिर्माण क्षमता नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की विनिर्माण क्षमता घरेलू और वैश्विक, दोनों जरूरतों को पूरा करती है। वर्ष 2026 में जी20 की अध्यक्षता अमेरिका कर रहा है। उन्होंने साथ ही कहा कि औद्योगिक क्षमता अपने आप में कोई समस्या नहीं है।

हालांकि, अगर उत्पादन भौगोलिक रूप से कुछ क्षेत्रों में छिपी हुई सब्सिडी और सहायता के कारण केंद्रित होता है, तो इससे विकृतियां पैदा हो सकती हैं। मंत्री ने कहा कि उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाना एक वैध उद्देश्य है लेकिन इसे विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों से बाहर के उपायों या विकासशील देशों पर समायोजन का बोझ डालने के बहाने के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। विकासशील देशों को औद्योगीकरण के लिए नीतिगत गुंजाइश बनाए रखने की जरूरत है। 

गोयल ने कहा, ''भारत की विनिर्माण क्षमता उसकी घरेलू और वैश्विक जरूरतों को पूरा करती है और जी20 अध्यक्षता द्वारा चिन्हित क्षेत्रों में भारत में संरचनात्मक रूप से जरूरत से अधिक क्षमता नहीं है।'' उन्होंने कहा कि भारत जी20 के कई सदस्यों की इस चिंता को साझा करता है कि कुछ देशों में व्यापार को विकृत करने वाली सहायता से डंपिंग और अनुचित रूप से कम कीमत पर सामान बेचने की स्थिति पैदा होती है। भारत साक्ष्य आधारित डब्ल्यूटीओ उपायों, जिनमें डंपिंग रोधी और प्रतिकारी शुल्क शामिल हैं, के जरिये ऐसी गतिविधियों से निपटता है। 

ये टिप्पणियां महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) ने 11 और 12 मार्च को अलग-अलग धारा 301 जांच शुरू की थी। बंधुआ मजदूरी और जरूरत से अधिक औद्योगिक क्षमता से जुड़ी चिंताओं को लेकर यह जांच 60 देशों के खिलाफ की जा रही है। बंधुआ मजदूरी से संबंधित एक जांच पूरी हो चुकी है और भारत समेत कुछ देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है। दूसरी जांच के अंतिम निष्कर्ष अभी आने बाकी हैं। 

अमेरिका ने इस्पात, कपड़ा, एल्युमीनियम, वाहन, बैटरी, सीमेंट, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा उत्पाद, कांच, मशीन टूल्स, मशीनरी, अलौह धातु, कागज, प्लास्टिक, प्रसंस्कृत खाद्य एवं पेय पदार्थ, रोबोटिक्स, उपग्रह, सेमीकंडक्टर, जहाज, सौर मॉड्यूल और परिवहन उपकरण जैसे क्षेत्रों में जरूरत से अधिक क्षमता का मुद्दा उठाया है। वाणिज्य मंत्रालय ने बयान में गोयल के हवाले से कहा, ''भारत कई सदस्यों की इस चिंता को साझा करता है कि कुछ देशों में व्यापार की स्थिति बिगाड़ने वाली सहायता से डंपिंग और अनुचित रूप से कम कीमत पर सामान बेचने की स्थिति पैदा होती है और भारत साक्ष्य के आधार पर डब्ल्यूटीओ (विश्व व्यापार संगठन) के उपायों, जैसे डंपिंग रोधी और प्रतिकारी शुल्क के जरिये इससे निपटता है, जिनकी न्यायिक समीक्षा की जा सकती है।''

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसकी अर्थव्यवस्था घरेलू मांग से संचालित है और 1.4 अरब लोगों की जरूरतों को पूरा करती है। साथ ही, भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक भरोसेमंद कड़ी के रूप में डिजाइन से लेकर तैयार माल तक विनिर्माण मूल्य श्रृंखलाएं विकसित कर रहा है। गोयल ने विस्कॉन्सिन के मिल्वॉकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के अंतिम दिन हिस्सा लिया। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बंधुआ मजदूरी समाप्त करने के मुद्दे पर गोयल ने कहा कि इसको खत्म करने के लिए भारत बिना किसी शर्त के पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। गोयल ने साथ ही दो-स्तरीय विवाद निपटान प्रणाली को बहाल करने की भी मांग की। 

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