Crude oil prices fall: तीन साल के हाई के बाद क्रूड में अचानक आई बड़ी गिरावट, 10% तक फिसल गए भाव

Edited By Updated: 10 Mar, 2026 10:55 AM

after hitting a three year high crude prices suddenly fell 10

मीडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें तीन साल के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई थीं लेकिन मंगलवार को शुरुआती कारोबार में इनमें तेज गिरावट देखने को मिली। दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी...

बिजनेस डेस्कः मीडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें तीन साल के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई थीं लेकिन मंगलवार को शुरुआती कारोबार में इनमें तेज गिरावट देखने को मिली। दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहने की आशंका कुछ कम हुई है और बाजार में कीमतों पर दबाव आया है।

मंगलवार के कारोबार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 10.55 डॉलर यानी 10.66% गिरकर 88.41 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 9.95 डॉलर यानी 10.50% की गिरावट के साथ 84.82 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है।

सोमवार को कच्चे तेल की कीमत 119.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो साल 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। उस समय सऊदी अरब समेत कई तेल उत्पादक देशों द्वारा उत्पादन रोकने की आशंका से वैश्विक सप्लाई पर दबाव बढ़ गया था, जिससे बाजार में तेज उछाल आया।

ट्रंप-पुतिन बातचीत के बाद नरम पड़ा बाजार

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच बातचीत के बाद तेल बाजार में कुछ नरमी आई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुतिन ने ईरान युद्ध को तुरंत खत्म करने के लिए ट्रंप के सामने कुछ प्रस्ताव रखे हैं।

एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहा युद्ध अंतिम चरण में है और अमेरिका उम्मीद से पहले इस संघर्ष को खत्म कर सकता है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि यह युद्ध चार से पांच हफ्ते तक चल सकता है।

ईरान की चेतावनी से बनी हुई है अनिश्चितता

हालांकि स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजरायल हमले जारी रखते हैं तो ईरान इस क्षेत्र से एक लीटर तेल भी एक्सपोर्ट नहीं होने देगा।

ईरान ने फिलहाल Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही रोक रखी है। दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20% इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ता है।

उत्पादन में कटौती से सप्लाई पर दबाव

तेल उत्पादक देशों की ओर से उत्पादन में कटौती भी बाजार को प्रभावित कर रही है। ओपेक समूह में दूसरे सबसे बड़े उत्पादक देश इराक ने रोजाना 13 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन घटा दिया है। इराक का कहना है कि उसके पास पर्याप्त स्टोरेज क्षमता नहीं बची है।

वहीं कुवैत ने भी तेल उत्पादन में कमी शुरू कर दी है। दूसरी ओर जी-7 देशों ने कहा है कि वे जरूरत पड़ने पर तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने को तैयार हैं, हालांकि फिलहाल आपातकालीन भंडार जारी करने का कोई वादा नहीं किया गया है।

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