Gold Prices पर Deutsche Bank का चौंकाने वाला अनुमान, 5 साल में $8000 तक पहुंच सकती हैं कीमतें

Edited By Updated: 29 Apr, 2026 06:13 PM

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जर्मनी के प्रमुख निवेश बैंक Deutsche Bank ने सोने को लेकर एक चौंकाने वाला अनुमान लगाया है। बैंक के मुताबिक, वैश्विक केंद्रीय बैंकों के रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी मौजूदा लगभग 30% से बढ़कर 40% तक पहुंच सकती है। इस पर आधारित एक सिमुलेशन में संकेत...

बिजनेस डेस्कः जर्मनी के प्रमुख निवेश बैंक Deutsche Bank ने सोने को लेकर एक चौंकाने वाला अनुमान लगाया है। बैंक के मुताबिक, वैश्विक केंद्रीय बैंकों के रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी मौजूदा लगभग 30% से बढ़कर 40% तक पहुंच सकती है। इस पर आधारित एक सिमुलेशन में संकेत मिला है कि आने वाले पांच वर्षों में सोने की कीमत 8000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है, जो मौजूदा स्तरों से करीब 80% की तेजी दर्शाता है। इंटरनेशनल मार्केट में इस समय कीमतें 4500 डॉलर प्रति औंस के आसपास बनी हुई हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में बढ़ते तनाव और अनिश्चितता के बीच सोना सबसे बड़े लाभार्थियों में शामिल हो सकता है। कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार को अमेरिकी डॉलर से हटाकर सोने में बदल रहे हैं, जिससे ‘डी-डॉलराइजेशन’ की प्रक्रिया तेज हो रही है।

225 मिलियन औंस से अधिक सोना जोड़ा

बैंक ने बताया कि 2008 के वित्तीय संकट के बाद से केंद्रीय बैंकों ने 225 मिलियन औंस से अधिक सोना खरीदा है। इसी दौरान वैश्विक रिजर्व में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी 60% से घटकर करीब 40% रह गई है। अब सोने की खरीद केवल चीन, रूस, भारत और तुर्की तक सीमित नहीं है, बल्कि कजाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर, मिस्र और यूएई जैसे देश भी इसमें सक्रिय हो गए हैं।

हालांकि, यह अनुमान कोई आधिकारिक प्राइस टारगेट नहीं बल्कि एक संभावित परिदृश्य है, जो बाजार की व्यापक सोच को दर्शाता है। World Gold Council के सर्वे के अनुसार, केंद्रीय बैंक आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता को सोने की खरीद का प्रमुख कारण मानते हैं।

वॉर की वजह से कीमतों में आई गिरावट

इस साल अब तक सोने की कीमतों में करीब 8% की बढ़ोतरी हुई है लेकिन अमेरिका-ईरान तनाव के बाद इसमें कुछ गिरावट भी आई है। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक अस्थिरता के कारण निवेशकों ने नकदी बढ़ाई है और जोखिम वाले निवेश घटाए हैं, जिससे सोने पर भी अल्पकालिक दबाव दिखा।

इसके अलावा, मजबूत अमेरिकी डॉलर और सख्त मौद्रिक नीति भी सोने के लिए चुनौती बनी हुई है। फिर भी, दीर्घकाल में सोना एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में अपनी भूमिका मजबूत बनाए रख सकता है, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितता बनी रहे।
 

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