रूस से तेल आयात में गिरावट, अप्रैल में 20% घटा इंपोर्ट, क्या है वजह

Edited By Updated: 28 Apr, 2026 12:37 PM

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अमेरिका-ईरान तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संभावित नाकेबंदी के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल जारी है। इसी बीच भारत के लिए एक अहम खबर सामने आई है रूस से कच्चे तेल के आयात में अप्रैल महीने में गिरावट दर्ज की गई है।

बिजनेस डेस्कः अमेरिका-ईरान तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संभावित नाकेबंदी के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल जारी है। इसी बीच भारत के लिए एक अहम खबर सामने आई है रूस से कच्चे तेल के आयात में अप्रैल महीने में गिरावट दर्ज की गई है।

अप्रैल में 20% तक घटा आयात

रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अप्रैल में रूस से कच्चे तेल का आयात घटाकर लगभग 15.7 लाख बैरल प्रतिदिन कर दिया, जो मार्च की तुलना में करीब 20% कम है। मार्च में आयात बढ़ा था, जिसकी वजह अमेरिका द्वारा दी गई अस्थायी छूट और ईरान से जुड़े तनाव थे।

सप्लाई प्रभावित होने की बड़ी वजह

रूसी तेल की सप्लाई में कमी की एक अहम वजह Ukraine के हमलों के बाद रूस के एक बड़े टर्मिनल पर लोडिंग में आई बाधा रही। इससे शिपमेंट प्रभावित हुआ और भारत तक पहुंचने वाली सप्लाई घट गई।

कौन-कौन हैं बड़े खरीदार?

  • अप्रैल में Indian Oil Corporation रूस से तेल खरीदने वाली सबसे बड़ी कंपनी रही।
  • इसका औसत आयात करीब 6.7 लाख बैरल प्रतिदिन रहा (कुल का ~42%)
  • Reliance Industries ने करीब 2.63 लाख बैरल प्रतिदिन आयात किया

अन्य कंपनियों में Bharat Petroleum Corporation Limited, Hindustan Petroleum Corporation Limited और Mangalore Refinery and Petrochemicals Limited शामिल हैं।

मार्च में क्यों बढ़ा था आयात?

मार्च में आयात करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था। इसकी मुख्य वजह “floating cargoes” यानी समुद्र में पहले से फंसी सप्लाई का भारत पहुंचना था। साथ ही, फरवरी में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण लोडिंग कम रही थी, जो मार्च में बढ़ी और उसका असर अप्रैल की सप्लाई पर दिखा।

वैश्विक दबाव और रणनीति

अमेरिका पहले भी भारत पर रूस से तेल आयात कम करने का दबाव बना चुका है। वहीं, रूस ने भारत को भरोसा दिया है कि वह कच्चे तेल और गैस की सप्लाई बढ़ाने के लिए तैयार है।
 

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