Edited By jyoti choudhary,Updated: 10 Aug, 2026 05:07 PM

Credit Card News: क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने वालों के लिए बिल पेमेंट में छोटी सी लापरवाही महंगी पड़ सकती है। कई बार व्यस्त होने, खाते में पर्याप्त बैलेंस न होने या ऑटो-डेबिट फेल होने की वजह से क्रेडिट कार्ड का बिल समय पर जमा नहीं होता, तो
Credit Card News: क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने वालों के लिए बिल पेमेंट में छोटी सी लापरवाही महंगी पड़ सकती है। कई बार व्यस्त होने, खाते में पर्याप्त बैलेंस न होने या ऑटो-डेबिट फेल होने की वजह से क्रेडिट कार्ड का बिल समय पर जमा नहीं होता, तो नुकसान सिर्फ लेट फीस तक सीमित नहीं रहेगा। पेमेंट में देरी और उसे क्रेडिट इंफार्मेशन कंपनियों को रिपोर्ट किए जाने का समय आपके क्रेडिट रिकॉर्ड को भी प्रभावित कर सकता है।
एक बार की देरी से कितना असर?
बैंक और अन्य लेंडर ग्राहक की पेमेंट हिस्ट्री को काफी महत्व देते हैं। अगर क्रेडिट कार्ड का बकाया लंबे समय तक जमा नहीं किया जाता और इसकी जानकारी क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों को रिपोर्ट होती है, तो इसका असर क्रेडिट रिकॉर्ड पर पड़ सकता है।
हालांकि, एक बार की देरी का मतलब यह नहीं है कि आपकी वित्तीय स्थिति हमेशा के लिए खराब हो गई। इसके बाद अगर आप लगातार समय पर भुगतान करते हैं, तो समय के साथ आपकी रिपेमेंट हिस्ट्री बेहतर हो सकती है।
लेट फीस के साथ ब्याज भी बढ़ा सकता है खर्च
क्रेडिट कार्ड का बिल देर से चुकाने पर बैंक नियमों के अनुसार लेट फीस लगा सकता है। इसके अलावा बकाया रकम पर ब्याज और अन्य फाइनेंस चार्ज भी लग सकते हैं। अगर आपने सिर्फ बिल का कुछ हिस्सा चुकाया है, तो बची हुई रकम पर आगे भी ब्याज लग सकता है। ऐसे में छोटी सी देरी खरीदारी की वास्तविक लागत को काफी बढ़ा सकती है।
मिनिमम पेमेंट को न समझें पूरा समाधान
कई लोग मिनिमम अमाउंट जमा करके मान लेते हैं कि बिल की समस्या खत्म हो गई लेकिन ऐसा नहीं है। मिनिमम पेमेंट से बाकी बकाया रकम खत्म नहीं होती और उस पर ब्याज लग सकता है। इसलिए जब संभव हो, हर महीने पूरा स्टेटमेंट अमाउंट चुकाना बेहतर आदत है।
ऑटो-डेबिट फेल होने पर तुरंत करें ये काम
अगर ऑटो-डेबिट फेल हुआ है, तो सबसे पहले बैंक से इसकी वजह पता करें। खाते में पर्याप्त बैलेंस न होना, ऑटो-डेबिट मैंडेट की समस्या या अन्य तकनीकी कारण इसकी वजह हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में जितनी जल्दी हो सके पेमेंट करें।
एक गलती और बार-बार देरी में बड़ा फर्क
लेंडर के नजरिए से एक बार की पेमेंट देरी और लगातार देर से भुगतान करना अलग-अलग स्थिति है। इसलिए समय पर पेमेंट करने की आदत बनाए रखना बेहद जरूरी है। बिल की तारीख के रिमाइंडर लगाएं, ऑटो-पे की सुविधा रखें और सैलरी आने के आसपास पेमेंट डेट सेट करें। ये छोटे कदम आपकी जेब और क्रेडिट रिकॉर्ड दोनों को सेफ रखने में मदद कर सकते हैं।