नोटबंदी के दौरान बैंक ने नहीं लिया 3.2 करोड़ का कैश, अब देना पड़ेगा करोड़ों का मुआवजा

Edited By Updated: 14 Mar, 2026 12:35 PM

bank s decision turned 3 2 crore into worthless paper

साल 2016 की नोटबंदी के दौरान एक कंपनी की नकदी जमा करने से इनकार करना Axis Bank को महंगा पड़ गया। National Consumer Disputes Redressal Commission (NCDRC) ने बैंक को आदेश दिया है कि वह कंपनी को करीब 3.2 करोड़ रुपए की राशि 6% ब्याज के साथ लौटाए।

बिजनेस डेस्कः साल 2016 की नोटबंदी के दौरान एक कंपनी की नकदी जमा करने से इनकार करना Axis Bank को महंगा पड़ गया। National Consumer Disputes Redressal Commission (NCDRC) ने बैंक को आदेश दिया है कि वह कंपनी को करीब 3.2 करोड़ रुपए की राशि 6% ब्याज के साथ लौटाए।

दरअसल, नोटबंदी के समय दिल्ली की कंपनी Procure Logistics Services Private Limited ने अपने खाते में बड़ी राशि जमा कराने की कोशिश की थी लेकिन बैंक ने यह कहते हुए नकदी स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि कंपनी का खाता ‘संदिग्ध’ और ‘हाई-रिस्क’ श्रेणी में है।

नोटबंदी के बाद पैसा बन गया बेकार

8 नवंबर 2016 को सरकार ने 2016 Indian Demonetization के तहत 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने की घोषणा की थी। ऐसे में बैंक द्वारा नकदी स्वीकार न करने के कारण कंपनी की करीब 3.2 करोड़ रुपए की राशि नोटबंदी की समयसीमा खत्म होने के बाद बेकार कागज बन गई, जिससे उसे बड़ा नुकसान हुआ।

कमीशन ने बैंक को ठहराया जिम्मेदार

मामले की सुनवाई के दौरान बैंक ने दलील दी कि कंपनी का पैसा संदिग्ध था, इसलिए उसे जमा करने की अनुमति नहीं दी गई लेकिन आयोग ने कहा कि बैंक ने एकतरफा तरीके से खाते को हाई-रिस्क मान लिया और कंपनी को अपने ही खाते में पैसा जमा करने से रोक दिया, जबकि खाते में केवाईसी नियमों का पालन किया गया था।

आयोग ने यह भी माना कि बैंक ने इस मामले में Reserve Bank of India (RBI) की अधिसूचनाओं और सरकारी नीतियों का पालन नहीं किया।

अगर शक था तो जमा कर रिपोर्ट करनी चाहिए थी

कमीशन ने अपने आदेश में कहा कि यदि बैंक को कंपनी की नकदी पर संदेह था, तब भी उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत पहले रकम जमा करनी चाहिए थी और फिर इस बारे में संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट करनी चाहिए थी।

कमीशन के मुताबिक बैंक का फैसला किसी सक्षम अधिकारी के निर्देश पर नहीं बल्कि उसकी एकतरफा कार्रवाई का परिणाम था। इसलिए बैंक को कंपनी को हुए 3,19,58,500 रुपए के नुकसान की भरपाई 6% ब्याज के साथ करने का आदेश दिया गया है।

पहले जमा किए थे 1.3 करोड़ रुपए

कंपनी ने नोटबंदी के दौरान अलग-अलग तारीखों पर बैंक में करीब 1.3 करोड़ रुपए जमा करा दिए थे लेकिन इससे ज्यादा नकदी जमा करने से रोक दिया गया। इसके कारण कंपनी के पास बचे करीब 3.2 करोड़ रुपए के पुराने नोट समयसीमा खत्म होने के बाद बेकार हो गए।
 

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