सीजफायर का फायदा, भारतीय कंपनियों ने एक्सपोर्ट में पकड़ी तेज रफ्तार

Edited By Updated: 10 Apr, 2026 03:14 PM

benefiting from the ceasefire indian companies accelerate exports

ईरान युद्ध के बाद हुए अस्थायी सीजफायर ने भारतीय कंपनियों के लिए नए मौके खोल दिए हैं। ईरान और मध्य-पूर्व क्षेत्र में हालात कुछ सामान्य होते ही भारत की कंपनियों ने तेजी से अपनी रणनीति बदलते हुए निर्यात और उत्पादन को फिर से गति देनी शुरू कर दी है।

बिजनेस डेस्कः ईरान युद्ध के बाद हुए अस्थायी सीजफायर ने भारतीय कंपनियों के लिए नए मौके खोल दिए हैं। ईरान और मध्य-पूर्व क्षेत्र में हालात कुछ सामान्य होते ही भारत की कंपनियों ने तेजी से अपनी रणनीति बदलते हुए निर्यात और उत्पादन को फिर से गति देनी शुरू कर दी है।

निर्यात और उत्पादन ने पकड़ी रफ्तार

युद्ध के दौरान कारोबार में आई 40-50% गिरावट के बाद अब कंपनियां फिर से पूरी क्षमता के साथ काम शुरू कर रही हैं। फार्मा सेक्टर में दवाओं की मांग बढ़ने लगी है, क्योंकि कई देश अपना स्टॉक दोबारा भर रहे हैं। वहीं, पैकेज्ड फूड कंपनियों ने भी सप्लाई चेन के सामान्य होने के संकेत दिए हैं।

इलेक्ट्रिकल और कंज्यूमर कंपनियां तैयार

एयर कंडीशनर, फ्रिज, वायर और केबल बनाने वाली कंपनियां भी बढ़ते ऑर्डर के लिए खुद को तैयार कर रही हैं। Havells India को उम्मीद है कि मिडिल ईस्ट में रीबिल्डिंग से उसे बड़ा फायदा मिल सकता है, क्योंकि कंपनी की करीब 40% निर्यात आय इसी क्षेत्र से आती है।

सप्लाई चेन में सुधार, वॉल्यूम बढ़ने की उम्मीद

AWL Agri Business ने दुबई के जेबेल अली पोर्ट पर फिर से शिपमेंट शुरू करने की योजना बनाई है। कंपनी को उम्मीद है कि माल की वॉल्यूम बढ़कर 4,000–5,000 टन प्रति माह तक पहुंच सकती है। युद्ध के दौरान कंपनियां वैकल्पिक रूट्स जैसे ओमान के जरिए सप्लाई कर रही थीं।

लोकल प्लांट्स भी फुल कैपेसिटी पर

Parle Products और Dabur India जैसी कंपनियां, जिनके मिडिल ईस्ट में प्लांट हैं, अब पूरी क्षमता से उत्पादन बढ़ा रही हैं। Blue Star भी बढ़ती मांग को देखते हुए उत्पादन बढ़ाने की तैयारी में है।

SMEs और निर्यातकों को राहत

शिपिंग रूट्स खुलने से छोटे और मध्यम निर्यातकों (SMEs) को भी बड़ी राहत मिली है। Federation of Indian Export Organisations के अनुसार, लॉजिस्टिक्स की दिक्कतें कम हो रही हैं और माल ढुलाई व बीमा की लागत, जो पहले 40-50% तक बढ़ गई थी, अब धीरे-धीरे घट रही है।
 

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