7.50 रुपए बढ़ने के बाद भी नुकसान में तेल कंपनियां, आगे और महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल

Edited By Updated: 25 May, 2026 05:26 PM

petrol and diesel may become even more expensive

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद फिलहाल कम नजर आ रही है। सरकारी तेल कंपनियां पिछले 10 दिनों में ईंधन के दाम करीब 7.50 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ा चुकी हैं लेकिन इसके बावजूद...

बिजनेस डेस्कः अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद फिलहाल कम नजर आ रही है। सरकारी तेल कंपनियां पिछले 10 दिनों में ईंधन के दाम करीब 7.50 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ा चुकी हैं लेकिन इसके बावजूद कंपनियों पर लागत का भारी दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आयात लागत, शिपिंग खर्च और पुराने घाटे की भरपाई के चलते आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

क्यों कम नहीं होंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

मार्केट एक्सपर्ट्स और ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान-अमेरिका तनाव के दौरान कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 114 डॉलर तक पहुंच गई थीं। इस दौरान तेल कंपनियों ने करीब ढाई महीने तक खुद बढ़ी हुई लागत का बोझ उठाया और कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी नहीं की।

विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की लागत में करीब 39% तक उछाल आया, जबकि घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अब तक सीमित बढ़ोतरी ही की गई है। ऐसे में कंपनियों को अपना पूरा घाटा वसूलने के लिए कीमतों में सैद्धांतिक रूप से 11-14 रुपए प्रति लीटर की ओर बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।

शिपिंग और बीमा लागत भी बढ़ी

हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में फिलहाल गिरावट आई है लेकिन पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसके चलते समुद्री मार्गों पर तेल परिवहन महंगा हो गया है।

अमेरिका और उत्तरी यूरोप से आने वाले तेल टैंकरों के बीमा प्रीमियम और माल ढुलाई खर्च में बढ़ोतरी हुई है। माना जा रहा है कि इन अतिरिक्त लागतों का असर भी आगे चलकर खुदरा ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है।

अब भी नुकसान में तेल कंपनियां

रिपोर्ट्स के मुताबिक हालिया बढ़ोतरी के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर प्रति लीटर करीब 10 रुपए और डीजल पर 13 रुपए तक का नुकसान हो रहा है। लगातार बढ़ते घाटे के चलते कंपनियों के सामने कीमतें बढ़ाने के अलावा सीमित विकल्प ही बचे हैं।
 

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