Edited By jyoti choudhary,Updated: 22 Jun, 2026 12:52 PM

भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने दो फूड कंपनियों पर 1-1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। कंपनियों ने अपने फूड प्रोडक्ट्स में '100%' शब्द का इस्तेमाल इस तरह से किया जिससे उनके प्रोडक्ट्स की असल...
बिजनेस डेस्कः भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने दो फूड कंपनियों पर 1-1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। कंपनियों ने अपने फूड प्रोडक्ट्स में '100%' शब्द का इस्तेमाल इस तरह से किया जिससे उनके प्रोडक्ट्स की असल बनावट के बारे में गलत जानकारी मिली।
CCPA ने 'स्टोरिया फूड्स एंड बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड' और 'मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशलिटीज लिमिटेड' पर जुर्माना लगाया है। साथ ही दोनों कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी पैकेजिंग, वेबसाइट और डिजिटल प्लेटफॉर्म से ऐसे दावे तुरंत हटाएं।
स्टोरिया के विज्ञापनों पर उठे सवाल
प्राधिकरण ने स्टोरिया के उन विज्ञापनों पर संज्ञान लिया, जिनमें ‘100% टेंडर कोकोनट वॉटर’ और ‘100% फ्रूट जूस’ जैसे दावे किए गए थे। जांच में पाया गया कि नारियल पानी के नाम पर बेचे जा रहे उत्पाद में पानी और कोकोनट वॉटर कंसंट्रेट का इस्तेमाल किया गया था, जिसे बाद में तैयार किया गया था। इसके अलावा, उत्पाद में प्रिजर्वेटिव भी मौजूद था, जिससे ‘100% प्राकृतिक’ होने का दावा संदिग्ध पाया गया।
इन प्रोडक्ट्स का प्रमोशन कंपनी की वेबसाइट, प्रोडक्ट पैकेजिंग और अमेजन, फ्ल्पिकार्ट, बिगबास्केट, ब्लिंकिट, जियोमार्ट और जेप्टो जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर किया गया था।
‘100% होल व्हीट ब्रेड’ दावे पर भी कार्रवाई
CCPA ने ‘इंग्लिश ओवन’ ब्रेड के विज्ञापनों की भी जांच की, जिनमें ‘100% आटा ब्रेड’ और ‘100% होल व्हीट ब्रेड’ जैसे दावे किए गए थे। सुनवाई के दौरान कंपनी ने स्वीकार किया कि उसके उत्पाद में लगभग 87% होल व्हीट आटा था। प्राधिकरण ने कहा कि ऐसे में ‘100%’ शब्द का इस्तेमाल वास्तविक उत्पाद संरचना से मेल नहीं खाता और उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता है।
कंपनियों की दलील नहीं मानी गई
कंपनियों ने तर्क दिया कि ‘100%’ का इस्तेमाल सामग्री की प्रकृति बताने के लिए किया गया था लेकिन CCPA ने इस दलील को खारिज कर दिया। प्राधिकरण का कहना था कि विज्ञापन को एक सामान्य उपभोक्ता की समझ के आधार पर परखा जाना चाहिए, न कि तकनीकी व्याख्याओं के आधार पर।
उपभोक्ताओं के हित में सख्त संदेश
CCPA ने स्पष्ट किया कि किसी भी खाद्य उत्पाद के बारे में गुणवत्ता, संरचना, पोषण या स्वास्थ्य संबंधी दावे तथ्यात्मक, प्रमाणित और गैर-भ्रामक होने चाहिए। प्राधिकरण ने कहा कि उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले विज्ञापनों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
यह कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम संबंधी दिशा-निर्देश, 2022 के तहत की गई है।