किफायती घरों की मांग पूरी करने के लिए सरकार से कर प्रोत्साहन की मांगः क्रेडाई

Edited By Updated: 19 Dec, 2025 06:09 PM

credai demands tax incentives from the government meet

रियल एस्टेट कंपनियों के शीर्ष निकाय क्रेडाई ने शुक्रवार को आगामी बजट में सरकार से किफायती आवास परियोजनाओं के लिए डेवलपरों को कर प्रोत्साहन देने की मांग की ताकि किफायती घरों की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके। देशभर के 15,000 से अधिक डेवलपरों का...

नई दिल्लीः रियल एस्टेट कंपनियों के शीर्ष निकाय क्रेडाई ने शुक्रवार को आगामी बजट में सरकार से किफायती आवास परियोजनाओं के लिए डेवलपरों को कर प्रोत्साहन देने की मांग की ताकि किफायती घरों की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके। देशभर के 15,000 से अधिक डेवलपरों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था क्रेडाई ने किफायती आवास के लिए 45 लाख रुपए की मूल्य सीमा को भी बढ़ाने की मांग की है। 

क्रेडाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेखर पटेल ने कहा, “हम लंबे समय से किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव की मांग कर रहे हैं। वर्ष 2017 में इसके लिए 45 लाख रुपए की सीमा तय की गई थी लेकिन तब से निर्माण लागत काफी बढ़ गई है।” उन्होंने कहा कि किफायती आवास की परिभाषा में 45 लाख रुपए की मूल्य सीमा या तो हटा देनी चाहिए या फिर इसे बढ़ाकर 90 लाख रुपए किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए एक फरवरी को पेश होने वाले बजट में किफायती घरों की आपूर्ति बढ़ाने के लिए कुछ सकारात्मक घोषणाएं होंगी।

पिछले कुछ वर्षों में किफायती घरों की आपूर्ति घटी है जबकि डेवलपरों का ध्यान मुख्य रूप से प्रीमियम एवं लक्जरी आवासीय परियोजना पर केंद्रित रहा है। इस वजह से मध्यम वर्ग के लिए घर का सपना पूरा होना काफी मुश्किल होता जा रहा है। क्रेडाई के राष्ट्रीय सचिव गौरव गुप्ता ने कहा कि किफायती आवास की मूल्य सीमा बढ़ाने से उपभोक्ताओं को फायदा होगा, क्योंकि किफायती आवास पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) केवल एक प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि किफायती आवास की आपूर्ति बढ़ाने के लिए निर्माण अनुबंधों पर डेवलपरों द्वारा दिए जाने वाले जीएसटी को भी 18 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत किया जाना चाहिए। ऐसा होने से किफायती श्रेणी के घरों की कीमतों में कमी आएगी।

गुप्ता ने कहा, “सरकार को किफायती आवास परियोजनाएं विकसित करने वाली रियल एस्टेट कंपनियों को कुछ कर प्रोत्साहन देने पर भी विचार करना चाहिए। पहले भी सरकार इस तरह के प्रोत्साहन दे चुकी है।” इस मौके पर क्रेडाई अध्यक्ष ने यह स्वीकार किया कि रियल एस्टेट विनियमन एवं विकास अधिनियम (रेरा) के आने से इस क्षेत्र में पारदर्शिता आई है और इस समय यह उद्योग 10-12 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। घरों की बिक्री एवं कीमतों के आंकड़ों पर पटेल ने कहा कि कोविड महामारी के बाद रियल एस्टेट बाजार का प्रदर्शन अच्छा रहा है और आने वाले वर्षों में भी यह रुझान जारी रहने की संभावना है।
 

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