कच्चे तेल में उछाल जारी, आसमान छू सकते हैं दाम, भारत पर क्या होगा असर?

Edited By Updated: 03 Mar, 2026 11:37 AM

crude oil prices continue to surge prices may skyrocket

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के फैसले की खबरों ने वैश्विक तेल बाजार में हलचल मचा दी है। लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। बाजार को आशंका है कि यदि आपूर्ति बाधित...

बिजनेस डेस्कः पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के फैसले की खबरों ने वैश्विक तेल बाजार में हलचल मचा दी है। लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। बाजार को आशंका है कि यदि आपूर्ति बाधित होती है तो दाम और ऊंचाई छू सकते हैं।

तीसरे दिन भी मजबूत रहा बाजार

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेंट क्रूड वायदा 1.4% (करीब 1.10 डॉलर) बढ़कर 78.83 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इससे पहले सोमवार को यह 82.37 डॉलर तक उछला था, जो जनवरी 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। दिन के अंत में कीमतें 6.7% की मजबूती के साथ बंद हुई थीं।

होर्मुज स्ट्रेट क्यों अहम?

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्गों में से एक है। वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग 20% इसी रास्ते से गुजरता है। यदि यहां आवाजाही बाधित होती है, तो सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ सकता है और कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।

100-140 डॉलर तक जा सकता है तेल?

विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि तनाव लंबा खिंचता है, तो ब्रेंट क्रूड 100 से 115 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। वहीं प्रमुख समुद्री मार्गों में रुकावट की स्थिति में कीमतें 120 से 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

तेल उत्पादक देशों के समूह OPEC के प्रमुख सदस्य सऊदी अरब और यूएई के पास 4-5 मिलियन बैरल प्रतिदिन अतिरिक्त उत्पादन क्षमता है, लेकिन यह आपूर्ति भी बड़े पैमाने पर होर्मुज मार्ग पर निर्भर करती है।

भारत पर क्या असर?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी से देश का आयात बिल बढ़ सकता है। तेल महंगा होने पर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा, जिससे महंगाई में इजाफा हो सकता है और आम लोगों की जेब पर असर पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितता फिलहाल तेल बाजार को सपोर्ट दे रही है। आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक हालात ही तय करेंगे कि कच्चे तेल की रफ्तार कितनी तेज होती है।
 

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