Edited By jyoti choudhary,Updated: 15 Sep, 2026 05:02 PM

2,000 रुपए से ज्यादा के UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाए जाने की संभावित व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। भारतपे के सह-संस्थापक और पूर्व शार्क टैंक इंडिया जज अशनीर ग्रोवर ने सरकार के तर्क पर सवाल उठाया है। उन्होंने सोशल मीडिया
नई दिल्लीः 2,000 रुपए से ज्यादा के UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाए जाने की संभावित व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। भारतपे के सह-संस्थापक और पूर्व शार्क टैंक इंडिया जज अशनीर ग्रोवर ने सरकार के तर्क पर सवाल उठाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट के जरिए UPI के संभावित चार्ज का पूरा गणित सामने रखा और पूछा कि जब बैंकिंग सिस्टम और RBI बड़े स्तर पर सरप्लस और मुनाफा कमा रहे हैं, तो UPI को लेकर अतिरिक्त शुल्क की जरूरत क्यों पड़ रही है।
'UPI पर चार्ज लगाना टैक्स जैसा'
अश्नीर ग्रोवर ने UPI को भारत की बड़ी डिजिटल उपलब्धियों में से एक बताते हुए कहा कि इस पर किसी तरह का चार्ज लगाना सही नहीं होगा। उन्होंने तर्क दिया कि कैश और ATM इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने में सालाना करीब ₹30,500 करोड़ खर्च होते हैं। ऐसे में सरकार को डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के बजाय UPI पर शुल्क लगाने की दिशा में नहीं जाना चाहिए।
ग्रोवर ने अपने पोस्ट में RBI से सरकार को ट्रांसफर किए गए करीब ₹2.87 लाख करोड़ के सरप्लस, लिस्टेड बैंकों के करीब ₹4.11 लाख करोड़ के मुनाफे और NPCI के करीब ₹1,888 करोड़ के प्री-टैक्स सरप्लस का भी जिक्र किया। उनका सवाल है कि जब सिस्टम में इतना पैसा मौजूद है तो UPI के संचालन का वास्तविक वित्तीय बोझ किस पर पड़ रहा है।
₹2,000 तक UPI और RuPay पर शुल्क नहीं
14 सितंबर को जारी गजट नोटिफिकेशन के मुताबिक, ₹2,000 तक के UPI और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चार्ज नहीं लगा सकते। हालांकि, ₹2,000 से अधिक के UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR को लेकर स्थिति अलग है और इसी ने नई बहस को जन्म दिया है।
बताया गया है कि पेमेंट एक्ट में किए गए बदलाव के बाद ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए MDR का फ्रेमवर्क तैयार करने का रास्ता खुला है। इसके तहत संबंधित समिति संभावित शुल्क की दर और व्यवस्था पर फैसला कर सकती है।