Edited By jyoti choudhary,Updated: 02 Sep, 2026 06:15 PM

अगर आप QR कोड या UPI के जरिए ग्राहकों से डिजिटल पेमेंट स्वीकार करते हैं, तो अपने KYC स्टेटस पर ध्यान देना जरूरी है। डिजिटल पेमेंट सिस्टम में मर्चेंट की पहचान और दस्तावेजों को अपडेट रखने की प्रक्रिया को लेकर छोटे कारोबारियों के बीच चिंता बढ़ रही है।
नई दिल्लीः अगर आप QR कोड या UPI के जरिए ग्राहकों से डिजिटल पेमेंट स्वीकार करते हैं, तो अपने KYC स्टेटस पर ध्यान देना जरूरी है। डिजिटल पेमेंट सिस्टम में मर्चेंट की पहचान और दस्तावेजों को अपडेट रखने की प्रक्रिया को लेकर छोटे कारोबारियों के बीच चिंता बढ़ रही है।
RBI के नए निर्देशों के अनुसार, सभी डिजिटल पेमेंट लेने वाले व्यापारियों के लिए 15 सितंबर 2026 तक री-केवाईसी (Re-KYC) वेरिफिकेशन हर हाल में पूरा करना है। डेडलाइन से चूक गए और री-केवाईसी नहीं कराया तो मर्चेंट्स के QR कोड ब्लॉक किए जा सकते हैं, जिससे उनका पेमेंट अटक सकता है।
री-केवाईसी (Re-KYC) का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाला मर्चेंट सही पहचान और वैध दस्तावेजों के साथ सिस्टम में रजिस्टर्ड हो। इससे फर्जी या गलत जानकारी के आधार पर खोले गए मर्चेंट अकाउंट्स की पहचान करने और वित्तीय धोखाधड़ी पर लगाम लगाने में मदद मिल सकती है।
छोटे दुकानदारों के लिए क्यों अहम है KYC?
QR कोड के जरिए पेमेंट लेने वाले छोटे दुकानदारों में रेहड़ी-पटरी वाले, चाय की दुकान चलाने वाले, सब्जी विक्रेता और किराना कारोबारी बड़ी संख्या में शामिल हैं। इनमें से कई व्यापारी डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल तो आसानी से करते हैं लेकिन KYC अपडेट करने की प्रक्रिया से पूरी तरह परिचित नहीं होते।
दस्तावेजों में नाम, मोबाइल नंबर या अन्य जानकारी का रिकॉर्ड से मेल न खाना भी कुछ कारोबारियों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। ऐसे मामलों में उन्हें दोबारा दस्तावेज जमा करने या अपने पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर से संपर्क करने की जरूरत पड़ सकती है।
छोटे कारोबारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती
ग्रामीण इलाकों और छोटे बाजारों में कारोबार करने वाले व्यापारियों के लिए डिजिटल KYC प्रक्रिया अभी भी चुनौती बनी हुई है। कई दुकानदारों को यह जानकारी नहीं होती कि KYC कब अपडेट करनी है, कौन-से दस्तावेज देने हैं और प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसका स्टेटस कैसे चेक करना है।
ऑनलाइन या सोशल मीडिया के जरिए कारोबार करने वाले छोटे व्यापारियों के सामने भी इसी तरह की दिक्कतें आ सकती हैं। बैंक या पेमेंट प्लेटफॉर्म के रिकॉर्ड में मौजूद जानकारी और व्यापारी द्वारा दिए गए दस्तावेजों में अंतर होने पर KYC अपडेट में देरी हो सकती है।