₹2,000 से ज्यादा UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क का विरोध, CTI बोला- ग्राहक की जेब से जाएगा पैसा

Edited By Updated: 15 Sep, 2026 02:57 PM

opposition to charges on upi transactions exceeding 2 000

2000 रुपए से ज्यादा के UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाए जाने की चर्चा के बीच चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने इसका विरोध किया है। CTI चेयरमैन बृजेश गोयल का कहना है कि UPI पेमेंट पर कोई शुल्क लगा तो इसका सीधा असर कारोबारियों और...

नई दिल्लीः 2000 रुपए से ज्यादा के UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाए जाने की चर्चा के बीच चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने इसका विरोध किया है। CTI चेयरमैन बृजेश गोयल का कहना है कि UPI पेमेंट पर कोई शुल्क लगा तो इसका सीधा असर कारोबारियों और ग्राहकों पर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से UPI और RuPay डेबिट कार्ड को MDR से पूरी तरह मुक्त रखने की मांग की है।

शुल्क का बोझ आखिरकार ग्राहक पर पड़ेगा

गोयल ने कहा कि भले ही सरकार यह कहे कि शुल्क ग्राहक से नहीं मर्चेंट से लिया जाएगा लेकिन हकीकत ये है कि इसका अंतिम बोझ ग्राहक पर ही आएगा। उनके अनुसार, अगर 2000 रुपए का सामान खरीदने पर दुकानदार को 1% भी MDR देना पड़ा तो 20 रुपए का नुकसान होगा। ऐसे में व्यापारी या तो ग्राहक से नकद भुगतान की मांग कर सकता है या फिर उत्पाद की कीमत बढ़ा सकता है।"

कैश लेन-देन बढ़ने की आशंका

CTI चेयरमैन ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे कारोबारियों को UPI से जोड़ने में काफी मेहनत हुई है। अगर बड़े ट्रांजैक्शन पर MDR लागू किया गया तो व्यापारी दोबारा नकद भुगतान को प्राथमिकता दे सकते हैं।

उन्होंने दावा किया कि दिल्ली के सदर बाजार, चांदनी चौक, लाजपत नगर, चावड़ी बाजार, कमला नगर, करोल बाग और गांधी नगर जैसे प्रमुख बाजारों में करीब 90 फीसदी भुगतान UPI के जरिए होता है। MDR लागू होने की स्थिति में व्यापारी यह कह सकते हैं कि ₹2,000 से अधिक का भुगतान UPI से स्वीकार नहीं किया जाएगा और ग्राहकों से नकद मांगा जाएगा।

'4% ट्रांजैक्शन लेकिन वैल्यू में 66 फीसदी'

गोयल ने कहा कि सरकार की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन कुल UPI लेन-देन का केवल करीब 4 फीसदी हैं। हालांकि, इन ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू करीब 66 फीसदी बताई जा रही है। ऐसे में उनका कहना है कि शुल्क का असर संख्या में कम दिखने वाले लेकिन बड़े मूल्य वाले कारोबारी लेन-देन पर अधिक पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, कपड़े, ज्वेलरी, फर्नीचर और होलसेल कारोबार में ज्यादातर भुगतान ₹2,000 से अधिक के होते हैं। वहीं, छोटे और मध्यम कारोबारी अक्सर 1-2 फीसदी के मार्जिन पर काम करते हैं। ऐसे में उनके लिए MDR का अतिरिक्त खर्च उठाना मुश्किल होगा।

 

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