अब महंगे होंगे बिस्किट्स, चीनी के बढ़ते दामों से Britannia जैसी बड़ी कंपनियों पर बढ़ा दबाव, गोल्डमैन का बड़ा अनुमान

Edited By Updated: 27 Aug, 2026 10:18 PM

eating biscuits with a cup of tea will be expensive

चाय के साथ बिस्किट और मीठी चीजें खाने के शौकीनों के लिए एक बेहद बुरी खबर है। चीनी की बढ़ती कीमतों के कारण आने वाले दिनों में बिस्किट, चॉकलेट, मिठाई और कोल्ड ड्रिंक्स जैसी मीठी चीजें महंगी हो सकती हैं।

नई दिल्लीः चाय के साथ बिस्किट और मीठी चीजें खाने के शौकीनों के लिए एक बेहद बुरी खबर है। चीनी की बढ़ती कीमतों के कारण आने वाले दिनों में बिस्किट, चॉकलेट, मिठाई और कोल्ड ड्रिंक्स जैसी मीठी चीजें महंगी हो सकती हैं। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) के एक बड़े अनुमान के मुताबिक, चीनी के दामों में हो रही इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा और सीधा असर देश की प्रमुख बिस्किट निर्माता कंपनी ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज (Britannia Industries) पर पड़ सकता है। अगर चीनी की कीमतें लंबे समय तक इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो इन कंपनियों का उत्पादन खर्च काफी बढ़ जाएगा, जिससे उनके मुनाफे (प्रॉफिट) पर सीधा असर पड़ेगा।

ब्रिटानिया पर क्यों मंडरा रहा है सबसे बड़ा संकट?
गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटानिया के कुल खर्च में चीनी और पाम ऑयल की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है। कंपनी के अधिकांश उत्पाद छोटे और कम कीमत वाले पैकेटों में बिकते हैं। इस वजह से कंपनी के लिए इस बढ़े हुए खर्च का बोझ सीधे ग्राहकों पर डालना (यानी कीमतें बढ़ाना) आसान नहीं होगा। इसी को ध्यान में रखते हुए गोल्डमैन सैक्स ने ब्रिटानिया को 'न्यूट्रल' रेटिंग दी है और इसके शेयर का टारगेट 6,000 रुपये रखा है। इसके अलावा, नेस्ले इंडिया और वरुण बेवरेजेज जैसी दिग्गज कंपनियों पर भी महंगी चीनी की मार पड़ सकती है, लेकिन ब्रिटानिया के मुकाबले इन पर असर कम रहने का अनुमान है।

त्योहारों के सीजन में मांग बढ़ी, बारिश ने बिगाड़ा खेल
भारत में अगस्त से नवंबर के बीच त्योहारों का सीजन (गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, दशहरा और दिवाली) रहता है। इस दौरान मिठाई, बिस्किट और अन्य मीठे पकवानों की मांग बाजार में अचानक बहुत तेज हो जाती है, जिससे चीनी की खपत भी बढ़ती है। दूसरी तरफ, कम बारिश और सूखे मौसम के कारण गन्ने की फसल प्रभावित हुई है, जिससे चीनी का उत्पादन घटने की आशंका है। सरकार ने पिछले महीने डीलरों को 30 दिन से ज्यादा चीनी का स्टॉक रखने से रोकने का सख्त नियम भी बनाया था, लेकिन इसके बावजूद पिछले एक महीने में चीनी के दाम करीब 10% तक बढ़ चुके हैं।

ग्लोबल मार्केट में भी हाहाकार
ब्राजील से लेकर यूरोप तक सप्लाई की किल्लत चीनी का यह संकट सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर में सप्लाई की भारी समस्या खड़ी हो गई है। दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश ब्राजील में खराब मौसम के कारण गन्ने की कटाई और चीनी की फसल में देरी हुई है। साथ ही, वहां गन्ने का इस्तेमाल चीनी बनाने के बजाय एथेनॉल बनाने में ज्यादा किया जा रहा है। भारत और थाईलैंड में भी इस साल चीनी का उत्पादन कम रहने का अनुमान है, जबकि यूरोप और ब्रिटेन में भीषण गर्मी जैसे मौसम के हालातों ने इस संकट को और अधिक बढ़ा दिया है।

सरकार और कंपनियों के बीच फंसा
पेच बाजार में बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बिस्किट और ब्रेड बनाने वाली कंपनियों को आदेश दिया है कि वे 31 अगस्त तक अपना अतिरिक्त चीनी का स्टॉक बाजार में बेच दें। सरकार को उम्मीद है कि इससे बाजार में सप्लाई बढ़ेगी और दाम नीचे आएंगे। लेकिन कंपनियों का तर्क है कि यदि वे अभी अपना स्टॉक सस्ते में बेच देती हैं, तो बाद में उन्हें बाजार से महंगे दामों पर चीनी खरीदनी पड़ेगी, जो उनके लिए और भी नुकसानदेह साबित हो सकता है।

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!