Edited By Pardeep,Updated: 28 Aug, 2026 01:04 AM

नेपाल और तिब्बत में बुधवार को अचानक आई भीषण बाढ़ से भारी तबाही मची है, जिसमें मरने वालों की संख्या बढ़कर 392 हो गई है। मृतकों में 389 लोग नेपाल के हैं, जबकि पड़ोसी तिब्बत में 3 लोगों की मौत दर्ज की गई है। दोनों देशों की सीमा पर लापता चल रहे करीब...
काठमांडू: नेपाल और तिब्बत में बुधवार को अचानक आई भीषण बाढ़ से भारी तबाही मची है, जिसमें मरने वालों की संख्या बढ़कर 392 हो गई है। मृतकों में 389 लोग नेपाल के हैं, जबकि पड़ोसी तिब्बत में 3 लोगों की मौत दर्ज की गई है। दोनों देशों की सीमा पर लापता चल रहे करीब 1,468 लोगों (नेपाल में 910 और तिब्बत में 558) की तलाश के लिए सेना और बचाव दल युद्धस्तर पर जुटे हुए हैं। लापता लोगों में 290 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जिनसे संपर्क साधने और उन्हें सुरक्षित बचाने के लिए 'तत्काल प्रयास' किए जा रहे हैं।
हिमनद टूटने से मची तबाही, कई गांव बहे
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमनद टूटने के कारण चट्टानें खिसक गईं और हिमस्खलन हुआ। इसके बाद बुधवार को पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव मध्य नेपाल की ओर आया, जिसने कई कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया। इस तबाही में मकान, वाहन, सड़कें और कंक्रीट के पुल बह गए, साथ ही क्षेत्र की जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
भारत सरकार मुस्तैद, 84 भारतीयों को बचाया गया
भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी के लिए विदेश मंत्रालय पूरी तरह सक्रिय है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने काठमांडू और बीजिंग में भारत के राजदूतों के साथ डिजिटल माध्यम से एक उच्चस्तरीय बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। राहत की बात यह है कि अब तक 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इनमें निर्माणाधीन त्रिशूली-एक जलविद्युत परियोजना में कार्यरत 63 श्रमिक और तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं। इसके अलावा, रसुवा में फंसे 27 विदेशी पर्यटकों में से 11 भारतीय पर्यटकों को भी हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित काठमांडू पहुंचाया गया है। ये पर्यटक कैलाश मानसरोवर और गोसाईंकुंड की यात्रा पर गए थे।
भारत ने भेजी 47.5 टन राहत सामग्री
संकट की इस घड़ी में भारत ने नेपाल की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत ने बुधवार को 10 टन सहायता सामग्री भेजने के बाद, बृहस्पतिवार को एक सैन्य परिवहन विमान के जरिए 37.5 टन अतिरिक्त मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) सामग्री, दवाएं और खाद्य सामग्री भेजी है। अब तक भारत कुल 47.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका है।
फिर मंडराया बाढ़ का खतरा: नई कृत्रिम झील बनी चुनौती
तिब्बत से निकलने वाली और नेपाल में भोटे कोशी नदी का हिस्सा बनने वाली नदियों के संगम के पास एक नई अवरोधक (कृत्रिम) झील बन गई है। चीनी अधिकारियों के अनुसार, इस झील में लगभग 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका है और अगले तीन दिनों में इसमें 30 लाख घन मीटर पानी और आने की आशंका है। यदि यह प्राकृतिक अवरोधक टूटता है, तो निचले इलाकों में पानी का तेज बहाव तबाही का दूसरा दौर ला सकता है। प्राधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और यात्रियों व सुरक्षा बलों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है।
बुनियादी ढांचा ध्वस्त, अस्पतालों में शवों का अंबार
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, बाढ़ से 35 सड़क पुल, 45 झूलानुमा पुल और करीब 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिससे संपर्क पूरी तरह कट गया है। काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल और चितवन के भरतपुर अस्पताल में अपनों की तलाश में लोगों का तांता लगा हुआ है। चितवन जिले से अब तक सबसे अधिक 137 शव बरामद किए गए हैं । अस्पतालों के शवगृहों में भी जगह कम पड़ रही है। नेपाल सेना के 44, पुलिस के 28 और सशस्त्र पुलिस बल के 13 जवान भी अभी लापता हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।