Edited By jyoti choudhary,Updated: 28 Aug, 2026 05:37 PM

पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने की आशंका है। अगर संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है और दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होती है, तो क्रूड की बढ़ती कीमतें भारत के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। इसके साथ रुपए...
नई दिल्लीः पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने की आशंका है। अगर संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है और दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होती है, तो क्रूड की बढ़ती कीमतें भारत के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। इसके साथ रुपए में कमजोरी आती है तो महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।
एमके वेल्थ मैनेजमेंट की एक रिपोर्ट में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात से भारत के सामने पैदा होने वाले आर्थिक जोखिमों को लेकर चिंता जताई गई है।
महंगा क्रूड बढ़ाएगा आयात का बोझ
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत बढ़ने का सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ता है। एमके की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण तेल की सप्लाई लंबे समय तक बाधित रहती है, तो इसका असर केवल पेट्रोल और डीजल की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा। महंगे ईंधन से ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ सकती है, जिससे सामान की ढुलाई और उत्पादन खर्च भी बढ़ेगा। इसका असर रोजमर्रा की कई वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है और महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
कमजोर रुपया बढ़ाएगा मुश्किल
महंगे कच्चे तेल के साथ अगर भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है, तो भारत की परेशानी और बढ़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की खरीदारी डॉलर में होती है। ऐसे में रुपए की कमजोरी के कारण भारतीय कंपनियों को तेल खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
एमके वेल्थ मैनेजमेंट के हेड ऑफ रिसर्च डॉ. जोसेफ थॉमस के मुताबिक, भारत के लिए जोखिम सिर्फ कच्चे तेल की ऊंची कीमतों तक सीमित नहीं है। रुपए में कमजोरी तेल की बढ़ी हुई कीमतों के प्रभाव को और गंभीर बना सकती है।
होरमुज और लाल सागर पर बाजार की नजर
रिपोर्ट में होर्मुज जलडमरूमध्य को सबसे अहम जोखिम वाले इलाकों में बताया गया है। वैश्विक तेल व्यापार में यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है और दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल प्रवाह से जुड़ा है।
इसके अलावा लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक तेल सप्लाई चेन पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। इससे क्रूड की कीमतों में अचानक तेजी देखने को मिल सकती है।
संघर्ष लंबा चला तो बढ़ सकती है आर्थिक चिंता
अगर पश्चिम एशिया में संघर्ष जल्द खत्म होता है और तेल की सप्लाई के प्रमुख रास्ते सामान्य हो जाते हैं, तो क्रूड की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है लेकिन अगर संघर्ष लंबा खिंचता है और तेल की सप्लाई बाधित रहती है, तो भारत को महंगे आयात, कमजोर रुपए और बढ़ती महंगाई की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। इसका असर घरेलू मांग और आर्थिक विकास की रफ्तार पर भी पड़ने की आशंका है।