Edited By jyoti choudhary,Updated: 11 Aug, 2026 12:04 PM

त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। कई जगहों पर भाव 50 रुपए प्रति किलोग्राम को पार कर गया है। त्योहारों के सीजन में बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठा सकती है। सरकारी और चीनी उद्योग से जुड़े...
नई दिल्लीः त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। कई जगहों पर भाव 50 रुपए प्रति किलोग्राम को पार कर गया है। त्योहारों के सीजन में बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठा सकती है। सरकारी और चीनी उद्योग से जुड़े सूत्रो ने बताया कि सरकार एथेनॉल उत्पादन में गन्ने के इस्तेमाल को सीमित करने पर विचार कर रही है।
पिछले एक महीने में चीनी के दाम करीब 10 फीसदी बढ़ चुके हैं। त्योहारी सीजन में खपत बढ़ने से अगले तीन महीनों तक कीमतें ऊंची बनी रहने की आशंका है। वहीं, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में कम बारिश के चलते अगले सीजन में चीनी उत्पादन प्रभावित होने का अनुमान है।
30 लाख टन चीनी बाजार में आ सकती है
चालू सीजन यानी सितंबर के अंत तक चीनी मिलों ने करीब 30 लाख मीट्रिक टन चीनी (कुल उत्पादन का 10%) एथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट किया है। अगर अगले सीजन में गन्ने से एथेनॉल बनाने पर रोक लगती है, तो यह 30 लाख टन अतिरिक्त चीनी बाजार में आ जाएगी। अतिरिक्त मात्रा में चीनी मार्केट में आने से इसका रेट घटेगा।
कैसे रुकेगा एथेनॉल उत्पादन?
सूत्रों के मुताबिक, सरकार चीनी मिलों को गन्ने के रस (Sugarcane Juice) और B-Heavy Molasses से एथेनॉल बनाने से रोक सकती है, क्योंकि इनमें चीनी की मात्रा अधिक होती है। इसके बजाय मिलों को केवल C-Heavy Molasses से एथेनॉल बनाने की अनुमति मिल सकती है, जो गन्ने से अधिकांश चीनी निकाल लेने के बाद बचता है। इससे गन्ने का अधिकांश हिस्सा चीनी बनाने में ही इस्तेमाल होगा।
20% एथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य का क्या होगा?
सरकार ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा है। यदि गन्ने से एथेनॉल की आपूर्ति घटती है, तो इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार मक्के और चावल के इस्तेमाल पर जोर देगी। देश में मक्का और चावल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, जिससे एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम प्रभावित नहीं होगा।