Edited By jyoti choudhary,Updated: 17 Sep, 2026 04:05 PM

देश में खाद्य पदार्थों की महंगाई के बीच सरकार आम लोगों को राहत देने की तैयारी कर रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार खाद्य तेल पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने पर विचार कर रही है। अगर यह फैसला लागू होता है तो बढ़ती हुई तेल की कीमतों को काबू में किया जा सकता...
नई दिल्लीः देश में खाद्य पदार्थों की महंगाई के बीच सरकार आम लोगों को राहत देने की तैयारी कर रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार खाद्य तेल पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने पर विचार कर रही है। अगर यह फैसला लागू होता है तो बढ़ती हुई तेल की कीमतों को काबू में किया जा सकता है और त्योहारों से पहले आम लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।
20% महंगा हुआ तेल
भारत में पिछले एक साल के दौरान वेजिटेबल ऑयल की कीमतों में करीब 20% की बढ़ोतरी हुई है। सितंबर से नवंबर के बीच देश में त्योहारों का सीजन रहता है। इस दौरान मिठाई, नमकीन और अन्य तली हुई चीजों की मांग बढ़ने से खाद्य तेल की खपत भी बढ़ जाती है। ऐसे में सरकार कीमतों में और तेजी को रोकने के लिए आयात शुल्क में कटौती का विकल्प देख रही है।
कितनी कम होगी इंपोर्ट ड्यूटी?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सरकार का मकसद लोगों को बढ़ती महंगाई से राहत देना है लेकिन इसके साथ किसानों के हितों को भी ध्यान में रखा जाएगा। सरकार बेसिक इंपोर्ट ड्यूटी में 5% की कटौती कर सकती है। इससे घरेलू सोयाबीन की कीमत सरकार की ओर से तय न्यूनतम समर्थन स्तर से ऊपर बनी रह सकती है और तिलहन किसानों को भी नुकसान से बचाया जा सकता है।
सिर्फ ड्यूटी घटाने से नहीं घटेंगी कीमतें
इंपोर्ट ड्यूटी घटाने का एक दूसरा असर भी हो सकता है। भारत में मांग बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल और सोयाबीन तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। उद्योग अधिकारी ने कहा कि इस वजह से सिर्फ इंपोर्ट ड्यूटी घटाना कीमतों को नियंत्रित करने का प्रभावी तरीका नहीं हो सकता।
दो-तिहाई खाद्य तेल विदेशों से खरीदता है भारत
भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य तेल आयातकों में शामिल है। देश अपनी कुल जरूरत का करीब दो-तिहाई खाद्य तेल विदेशों से खरीदता है। भारत में बड़े पैमाने पर पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल और सनफ्लावर ऑयल का आयात होता है। इनकी आपूर्ति मुख्य रूप से मलेशिया, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, रूस और यूक्रेन जैसे देशों से होती है।