Edited By jyoti choudhary,Updated: 13 Jan, 2026 05:05 PM

सर्दियों के मौसम में लोग सेहत को लेकर ज्यादा सतर्क होते दिख रहे हैं और इसका सीधा असर खाने के तेल की खपत पर पड़ा है। जहां एक ओर पाम ऑयल की मांग में तेज गिरावट आई है, वहीं दूसरी ओर सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की खपत और आयात में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई...
बिजनेस डेस्कः सर्दियों के मौसम में लोग सेहत को लेकर ज्यादा सतर्क होते दिख रहे हैं और इसका सीधा असर खाने के तेल की खपत पर पड़ा है। जहां एक ओर पाम ऑयल की मांग में तेज गिरावट आई है, वहीं दूसरी ओर सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की खपत और आयात में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह जानकारी सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों में सामने आई है।
वनस्पति तेल आयात में बढ़ोतरी
एसईए के मुताबिक, दिसंबर 2025 में भारत का कुल वनस्पति तेल आयात 8 फीसदी बढ़कर 13.83 लाख टन पहुंच गया, जबकि दिसंबर 2024 में यह 12.75 लाख टन था। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की ज्यादा शिपमेंट के कारण हुई है। हालांकि, चालू तेल वर्ष 2025-26 के पहले दो महीनों (नवंबर-दिसंबर) में कुल आयात पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 12 फीसदी घटकर 25.67 लाख टन रहा।
पाम ऑयल आयात में तेज गिरावट
दिसंबर 2025 में पाम ऑयल का आयात 20 फीसदी घटकर 5.07 लाख टन रह गया, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 6.32 लाख टन था। एसईए के अनुसार, दिसंबर में आरबीडी पामोलिन का आयात शून्य रहा, जबकि क्रूड पाम ऑयल का आयात बढ़कर 5.03 लाख टन पहुंच गया, जो पिछले वर्ष 3.26 लाख टन था।
सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की मांग बढ़ी
आंकड़ों के मुताबिक, सूरजमुखी तेल का आयात दिसंबर में 32.19 फीसदी बढ़कर 3.49 लाख टन हो गया, जबकि एक साल पहले यह 2.64 लाख टन था। वहीं सोयाबीन तेल का आयात 20.23 फीसदी बढ़कर 5.05 लाख टन पहुंच गया। इसके उलट, गैर-खाद्य तेलों का आयात घटकर 21,000 टन रह गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 45,764 टन था।
घरेलू स्थिति भी मजबूत
भारत के लिए इंडोनेशिया और मलेशिया ताड़ तेल के प्रमुख आपूर्तिकर्ता बने हुए हैं। इस बीच, रबी सीजन में तिलहन की बुवाई भी बढ़ी है। 2 जनवरी तक तिलहन बुवाई 3.04 फीसदी बढ़कर 99.30 लाख हेक्टेयर हो गई है। वहीं 1 जनवरी तक खाद्य तेलों का कुल भंडार 17.50 लाख टन रहा, जो पिछले महीने के 16.21 लाख टन से ज्यादा है।