भारत के सामने तेज वृद्धि के साथ रोजगार बढ़ाने की भी चुनौती: सुब्बाराव

Edited By Updated: 21 Oct, 2026 04:59 PM

india faces the challenge of boosting employment alongside rapid growth subbara

भारतीय रिजर्व बैंक (आर.बी.आई.) के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव ने कहा है कि अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को सात प्रतिशत या उससे अधिक के स्तर पर बनाए रखने के लिए निजी निवेश बढ़ाने, अधिक रोजगार देने वाले विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन देने, मानव पूंजी में...

नई दिल्लीः भारतीय रिजर्व बैंक (आर.बी.आई.) के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव ने कहा है कि अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को सात प्रतिशत या उससे अधिक के स्तर पर बनाए रखने के लिए निजी निवेश बढ़ाने, अधिक रोजगार देने वाले विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन देने, मानव पूंजी में सुधार करने और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ बेहतर एकीकरण की जरूरत है। 

सुब्बाराव ने कहा कि चुनौती केवल तेजी से आर्थिक वृद्धि हासिल करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि वृद्धि से उत्पादकता बढ़े, अधिक रोजगार पैदा हों और अर्थव्यवस्था झटकों का सामना करने में सक्षम बने। उन्होंने कहा, ''पहली तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर बताती है कि अर्थव्यवस्था कई लोगों की उम्मीद से अधिक मजबूत है। मैं मध्यम अवधि में भारत की संभावनाओं को लेकर आशावादी हूं, लेकिन निश्चिंत नहीं हूं।'' 

विश्व बैंक ने हाल ही में चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर का अनुमान अप्रैल के अपने अनुमान से 0.5 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया था। इसके पीछे वैश्विक चुनौतियों के बावजूद घरेलू मांग में मजबूती और निर्यात में अच्छी वृद्धि को वजह बताया गया था। 

सुब्बाराव ने कहा कि पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि की गति बनाए रखने में तीन कारकों की भूमिका रही। घरेलू खपत मजबूत बनी रही, बुनियादी ढांचे में सार्वजनिक निवेश ने मांग को समर्थन दिया और कुछ क्षेत्रों में निजी निवेश को प्रोत्साहित किया। इसके अलावा विनिर्माण और सेवाओं, खासकर वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाओं का प्रदर्शन अच्छा रहा। यह पूछे जाने पर कि तेज आर्थिक वृद्धि के बावजूद पर्याप्त रोजगार क्यों नहीं पैदा हो रहे हैं, उन्होंने कहा कि समस्या यह नहीं है कि वृद्धि से रोजगार पैदा ही नहीं होते, बल्कि आर्थिक वृद्धि की संरचना भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी उसकी गति। 

वर्ष 2008 से 2013 तक आर.बी.आई. के गवर्नर रहे सुब्बाराव ने कहा, ''अर्थव्यवस्था में पूंजी-गहन उद्योगों, स्वचालन और अपेक्षाकृत कम लोगों को रोजगार देने वाले क्षेत्रों के कारण तेजी से वृद्धि हो सकती है। उत्पादन बढ़ता है, लेकिन रोजगार में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं होती। भारत के लिए यह एक प्रमुख चिंता है।'' उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में लाखों कामगार अपनी क्षमता के अनुरूप काम नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, सेवा क्षेत्र में कई नौकरियां असंगठित क्षेत्र में हैं, जिनमें उत्पादकता कम है और वेतन भी कम मिलता है। 

सुब्बाराव ने कहा कि शिक्षित युवाओं को भी उपयुक्त रोजगार पाने में कठिनाई हो रही है, क्योंकि अर्थव्यवस्था उनकी योग्यता और कौशल के अनुरूप पर्याप्त नौकरियां पैदा नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा, ''यह केवल श्रम बाजार की समस्या नहीं, बल्कि व्यापक आर्थिक चिंता का विषय है।'' उन्होंने कहा कि यदि आर्थिक वृद्धि का लाभ आबादी के बड़े हिस्से की आय में नहीं दिखता है, तो खपत की मांग सीमित रहती है। 

सुब्बाराव ने कहा कि कपड़ा, परिधान, जूते और खाद्य प्रसंस्करण जैसे अधिक रोजगार देने वाले विनिर्माण क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। इसके साथ ही अधिक उत्पादकता वाले सेवा क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने, व्यावसायिक प्रशिक्षण में सुधार करने और छोटे कारोबार क्षेत्रों के लिए बड़े तथा अधिक उत्पादक उद्यमों के रूप में विकसित होने की प्रक्रिया आसान बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसी अर्थव्यवस्था की सफलता केवल इस बात से नहीं मापी जानी चाहिए कि वह कितना उत्पादन करती है, बल्कि यह भी देखा जाना चाहिए कि उस उत्पादन से कितने लोगों को सम्मानजनक आजीविका मिलती है। 

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