Edited By Niyati Bhandari,Updated: 22 Oct, 2026 03:06 PM
Ahoi Ashtami 2026: अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर 2026 को रखा जाएगा। जानिए अहोई माता की पूजा का शुभ मुहूर्त, तारों के दर्शन का समय और आसान पूजन विधि।
Ahoi Ashtami 2026: अहोई अष्टमी का व्रत माताओं द्वारा अपनी संतान की लंबी उम्र, बेहतर स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। इस दिन माताएं दिनभर निर्जला/निराहारी व्रत रखकर शाम को अहोई माता की पूजा करती हैं और शाम को तारों को अर्घ्य देकर व्रत पूरा करती हैं।
Ahoi Ashtami 2026 Date कब है अहोई अष्टमी 2026?
हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पावन व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है।
अष्टमी तिथि का प्रारंभ 1 नवंबर 2026 (रविवार) को दोपहर 2 बजकर 51 मिनट से होगा और समापन 2 नवंबर 2026 सोमवार को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर होने वाला है।
Ahoi Ashtami 2026 Fast Date अहोई अष्टमी व्रत की सही तारीख
चूंकि अष्टमी तिथि में 1 नवंबर की शाम को ही तारों के दर्शन होंगे, इसलिए 1 नवंबर 2026, रविवार को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाएगा और शाम को पूजा की जाएगी।

Ahoi Mata Vrat Vidhi अहोई अष्टमी व्रत विधि
अहोई अष्टमी का व्रत संतान सुख व संतान की कामना के लिए किया जाता है। इस दिन निसंतान दंपत्ति भी संतान की कामना करते हुए अहोई अष्टमी के व्रत का विधि-विधान से पालन करते हैं। अहोई अष्टमी के उपाय, व्रत व पूजन देवी पार्वती के अहोई स्वरूप के निमित अपनी संतान की सुरक्षा, लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और संतान की प्राप्ति के लिए किया जाता है।
व्रत के दिन प्रात: उठ कर स्नान किया जाता है और पूजा के समय ही संकल्प लिया जाता है कि ‘‘हे अहोई माता, मैं अपने पुत्र की लम्बी आयु एवं सुखमय जीवन हेतु अहोई व्रत कर रही हूं। अहोई माता मेरे पुत्रों को दीर्घायु, स्वस्थ एवं सुखी रखें।’’
इस व्रत में बयना सास, ननद या जेठानी को दिया जाता है। व्रत पूरा होने पर व्रती महिलाएं अपनी सास और परिवार के बड़े सदस्यों का पैर छूकर आशीर्वाद लेती हैं। इसके बाद वे अन्न-जल ग्रहण करती हैं। अहोई अष्टमी पर महिलाएं चांदी के मोती की माला भी बनाती हैं। इसमें अहोई माता का लॉकेट लगाया जाता है। हर साल इस माला में दो मोती और जोड़ दिए जाते हैं, इसको स्याउ कहा जाता है।

Ahoi Ashtami Shubh Muhurat & Timings पूजा का शुभ मुहूर्त और प्रमुख समय
अहोई अष्टमी पर पूजा और संध्या काल में तारों के दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। पंचांग के अनुसार शुभ समय इस प्रकार हैं:
पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 4:59 बजे से शाम 6:15 बजे तक।
तारों के दर्शन का समय: शाम 5:22 बजे के आसपास।
चंद्रोदय समय: रात 11:05 बजे के आसपास।
अहोई अष्टमी पूजा मंत्र: ॐ उमादेव्यै नमः॥
Ahoi Ashtami Puja Vidhi अहोई अष्टमी की पूजन विधि
अहोई पूजन के लिए शाम के समय घर की उत्तर दिशा की दीवार पर गेरू से आठ कोष्ठक की एक पुतली बनाई जाती है। उसी के पास सेह तथा उसके बच्चों की आकृतियां बनाई जाती हैं। कई समृद्ध परिवार इस दिन चांदी की अहोई बनवकार पूजन भी करते हैं। चांदी की अहोई में दो मोती डालकर विशेष पूजा भी की जाती है। इसके लिए एक धागे में अहोई व दोनों चांदी के दानें डाले जाते हैंं। हर साल इसमें दाने जोड़े जाने की मान्यता प्रचलित है। घर की उत्तर दिशा अथवा ब्रह्म केंद्र में ज़मीन पर गाय के गोबर और चिकनी मिट्टी से लीपकर कलश स्थापना की जाती है। पूजन के समय कलश स्थापना कर प्रथम पूज्य गणेश की पूजा की जाती है उसके बाद अहोई माता की पूजा करके उनका षोडशोपचार पूजन किया जाता है तथा उन्हें दूध, शक्कर और चावल का भोग लगाया जाता है। इसके बाद एक लकड़ी के पाटे पर जल से भरा लोटा स्थापित करके अहोई की कथा सुनी और कही जाती है।
सूर्यास्त के पश्चात तारों के निकलने पर महादेवी व उनके सात पुत्रों का विधान से पूजन किया जाता है। पूजा के बाद बुजुर्गों के पैर छूकर आर्शीवाद लेते हैं। इसके बाद करवा से तारों पर जल का अर्घ्य देकर उनका पूजन किया जाता है।
तारों के निकलने पर महादेवी का षोडशोपचार पूजन करें। गौघृत में हल्दी मिलाकर दीपक करें, चंदन की धूप करें। देवी पर रोली, हल्दी व केसर चढ़ाएं। चावल की खीर का भोग लगाएं। पूजन के बाद भोग किसी गरीब कन्या को दान दे दें। जीवन से विपदाएं दूर करने के लिए महादेवी पर पीले कनेर के फूल चढ़ाएं। अपनी संतान की तरक्की के लिए देवी अहोई पर हलवा पूड़ी चढ़ाकर गरीब बच्चों में बाटें दें। संतानहीनता के निदान के लिए कुष्मांड पेट से 5 बार वारकर मां पार्वती पर चढ़ाएं।
