Edited By Niyati Bhandari,Updated: 22 Oct, 2026 03:07 PM

Dhanteras 2026 Date & Puja Muhurat: साल 2026 में धनतेरस की तिथि को लेकर बना कंफ्यूजन दूर करें। जानें, 6 या 7 नवंबर में से किस दिन मनाया जाएगा धनतेरस, भगवान धन्वंतरि पूजन का सही शुभ मुहूर्त, यम दीपदान का महत्व और खरीदारी का समय।
Dhanteras 2026: दिवाली के पांच दिवसीय महापर्व की शुरुआत धनतेरस (धन त्रयोदशी) से होती है। इस दिन आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि, धन के देवता कुबेर, माता लक्ष्मी और यमराज की पूजा का विशेष विधान है। साल 2026 में तिथियों के मेल के कारण धनतेरस की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि यह पर्व 6 नवंबर को मनाया जाएगा या 7 नवंबर को।
पंचांग की गणना के अनुसार, साल 2026 में धनतेरस का पर्व शुक्रवार, 6 नवंबर को ही मनाया जाएगा।
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 6 नवंबर 2026 को सुबह 10:30 बजे शुरू होगी।
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर 2026 को सुबह 10:47 बजे समाप्त होगी।
शास्त्रों के अनुसार धनतेरस पर शाम के समय लक्ष्मी पूजन और धन्वंतरि पूजा का विधान है, इसलिए 6 नवंबर को धनतेरस मनाना ही धर्मशास्त्रों के अनुकूल और सही है।
Dhanteras Puja Muhurat धनतेरस 2026 पूजा और शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर प्रदोष काल और वृषभ काल में पूजा करने का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है।
पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त: शाम 06:02 बजे से रात 07:57 बजे तक।
प्रदोष काल का समय: शाम 05:33 बजे से रात 08:09 बजे तक।
वृषभ काल का समय: शाम 06:02 बजे से रात 07:57 बजे तक।

धनतेरस खरीदारी का शुभ समय Dhanteras Shopping Muhurat
6 नवंबर की प्रात: 10:30 बजे के बाद कभी भी खरीदारी की जा सकती है।
धनतेरस पर लोग सोना व चांदी खरीदना बेहद शुभ समझते हैं क्योंकि इन पर मां लक्ष्मी का वास माना जाता है और ये सबसे बढ़िया पैसे की सेविंग में भी काउंट होता है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार इस दिन नया बर्तन खरीदने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है यानि कि मां लक्ष्मी का वास होता है।मान्यता है कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे तो उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था। भगवान धन्वंतरि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही धनतेरस के दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है। माना जाता है जो भी इंसान घर में नया बर्तन लाता है उसके घर में सौभाग्य, वैभव और स्वास्थ्य लाभ होता है। इस दिन धन के देवता कुबेर की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
भगवान धन्वंतरि पूजा का धार्मिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, धनतेरस के दिन दक्षिण दिशा में दीपक जलाना शुभ होता है। कहते हैं कि एक दिन दूत ने यमराज से बातों ही बातों में प्रश्न किया कि क्या अकाल मृत्यु से बचने का कोई उपाय है ? इस प्रश्न के उत्तर में यमराज में कहा कि व्यक्ति धनतेरस की शाम यम के नाम का दीपक दक्षिण दिशा में रखता है उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती है। इसी मान्यता के अनुसार, धनतेरस के दिन लोग दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाते हैं।
Dhanteras puja vidhi धनतेरस पूजा विधि
धनतेरस के दिन शाम के वक्त शुभ मुहूर्त में उत्तर की ओर कुबेर और धन्वंतरि की स्थापना करें।
मां लक्ष्मी व गणेश की भी प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
फिर दीप प्रज्वलित करें और विधिवत पूजन करना आरंभ करें।
तिलक करने के बाद पुष्प, फल आदि चीजें अर्पित करें।
कुबेर देवता को सफेद मिष्ठान और धन्वंतरि देव को पीले मिष्ठान का भोग लगाएं।
पूजा के दौरान 'ऊँ ह्रीं कुबेराय नमः' इस मंत्र का जाप करते रहें।
भगवान धन्वंतरि को प्रसन्न करने के लिए इस दिन धन्वंतरि स्तोत्र का पाठ जरूर करें।
अब अंत में गलती की क्षमा मांगते हुए हाथ जोड़कर प्रणाम करें।
