Shukra Pradosh Vrat: शुक्र प्रदोष पर दूर होगी हर बाधा, यहां पढ़ें शाम की संपूर्ण पूजा विधि, व्रत कथा और ऐश्वर्य प्राप्ति के अचूक धार्मिक उपाय

Edited By Updated: 22 Oct, 2026 03:06 PM

shukra pradosh vrat

Shukra Pradosh Vrat Vidhi & Muhurat: आश्विन मास के शुक्र प्रदोष व्रत की सही तिथि को लेकर संशय दूर करें। जानिए, प्रदोष काल पूजा मुहूर्त, शिव-पार्वती पूजन की संपूर्ण विधि, नियम और आर्थिक समृद्धि के लिए विशेष धार्मिक उपाय।

Shukra Pradosh Vrat: हिंदू धर्मशास्त्रों में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त करने का सबसे उत्तम साधन माना गया है। हर माह के दोनों पक्षों (कृष्ण और शुक्ल) की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। जब त्रयोदशी तिथि शुक्रवार के दिन पड़ती है, तो इसे 'शुक्र प्रदोष व्रत' कहा जाता है। शुक्रवार का दिन धन-वैभव की देवी मां लक्ष्मी और शुक्र ग्रह से संबंधित होता है। ऐसे में शुक्र प्रदोष के दिन महादेव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करने से साधक को न केवल मानसिक शांति और आरोग्य मिलता है, बल्कि घर में सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन में मधुरता भी आती है।

PunjabKesari Shukra Pradosh Vrat
शिव को समर्पित त्रयोदशी तिथि सभी दोषों का नाश करती है अतः इसे प्रदोष कहते हैं। भविष्योत्तर पुराण के अनुसार त्रयोदशी के स्वामी कामदेव हैं व इसके अमृत कला का पान कुबेर करते हैं। शास्त्रनुसार इस दिन समस्त दिव्यात्माएं अपने सूक्ष्म स्वरूप में शिवलिंग में समा जाती हैं। इस दिन प्रदोषकाल में शिवलिंग के दर्शन मात्र से सर्व जन्मों के पाप नष्ट होते हैं व बिल्वपत्र चढ़ाकर दीप जलाने से अनेक पुण्य प्राप्त होते हैं।

वार अनुसार प्रदोष पूजन करने का शास्त्रीय विधान है। शुक्र प्रदोष के बारे में छ्ंद कहा गया है "अभीष्ट सिद्धि की कामना, यदि हो हृदय विचार। धर्म, अर्थ, कामादि, सुख, मिले पदारथ चार"।

तिथियों का गणित: कब है त्रयोदशी और कब रखें व्रत?
पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ और समापन काल प्रदोष काल की पूजा के अनुसार तय किया जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत उसी दिन रखा जाता है, जिस दिन सूर्यास्त के समय (प्रदोष काल में) त्रयोदशी तिथि व्याप्त हो।

पूजा का सबसे श्रेष्ठ समय प्रदोष काल मुहूर्त
प्रदोष व्रत में मुख्य पूजा सूर्यास्त के बाद यानी प्रदोष काल में की जाती है। सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद तक का समय प्रदोष काल माना जाता है।

शुभ पूजा मुहूर्त: शाम 05:45 पी एम से रात 08:25 पी एम तक।

इस 2 घंटे 40 मिनट की अवधि में भोलेनाथ की पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करने से समस्त पापों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

PunjabKesari Shukra Pradosh Vrat
Shukra Pradosh Vrat Katha शुक्र प्रदोष व्रत कथा
शुक्र प्रदोष की पौराणिक कथा अनुसार कालांतर में एक धनिक पुत्र का उसके विवाह पश्चात गौना शेष था। धनिक पुत्र ने तुरंत पत्नी को लाने का निश्‍चय किया। उस समय शुक्र अस्त थे। ऐसे में विवाह मंगनी व गौना शुभ नहीं होता। माता-पिता व ससुराल पक्ष ने उसे समझाया परंतु धनिक पुत्र नहीं माना। ससुराल ने विवश होकर कन्या की विदाई कर दी।

विदाई के बाद ही उसकी बैलगाड़ी का पहिया अलग हो गया व बैल की टांग टूट गई। रास्ते में दंपत्ति को डाकुओं ने लूट लिया। दोनों रोते-पीटते घर पहुंचे। वहां धनिक पुत्र को सांप ने डस लिया। वैद्य ने निरीक्षण के बाद घोषणा की कि धनिक पुत्र तीन दिन में मर जाएगा।

विद्वान ब्राह्मण ने माता-पिता को शुक्र प्रदोष व्रत करने का परामर्श दिया व पुनः दंपत्ति को ससुराल भेजने को कहा तथा इन घटनाओं का कारण शुक्रास्त होना बताया। धनिक पुत्र ने ब्राह्मण की सलाह मानी व ससुराल पहुंचते ही धनिक पुत्र की हालत ठीक हो गई।

महर्षि सूत के अनुसार शुक्र प्रदोष व्रत करने से महादेव से जीवनसाथी की समृद्धि का वर मिलता है। जीवन में ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है तथा दांपत्य सुख में आ रही कमी दूर होती है।

Shukra Pradosh Vrat Vidhi शुक्र प्रदोष व्रत विधि
संध्या काल शिवालय जाकर शिवलिंग का विधिवत पूजन करें। गौघृत का दीप करें, चंदन धूप करें, गुलाबी फूल चढ़ाएं, गुलाल चढ़ाएं, इत्र चढ़ाएं, खीर का भोग लगाएं तथा इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। पूजन के बाद भोग किसी सुहागन को भेंट करें।

Shukra Pradosh Puja Mantra शुक्र प्रदोष पूजा मंत्र: क्लीं काममूर्तये नमः शिवाय क्लीं॥  

Shukra Pradosh Upay शुक्र प्रदोष उपाय
ऐश्वर्यवान जीवन हेतु शिवालय में सुगंधित तेल के 13 दीपक जलाएं।

अखंड सौभाग्य हेतु शिवालय में इत्र मिले गौघृत का दीपदान करें।

सर्व सुखों की प्राप्ति हेतु मौली में पिरोए 13 गुलाब के फूल शिवलिंग पर चढ़ाएं।

PunjabKesari Shukra Pradosh Vrat

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

 

 

 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!