Indian Budget History: 1947 से 2020 तक के बजट आज भी किए जाते हैं याद

Edited By Updated: 30 Jan, 2026 02:02 PM

indian budget history budgets from 1947 to 2020 are still remembered today

भारत 1947 में आजाद हुआ और तब से देश में अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकारें रहीं। हर सरकार की आर्थिक विचारधारा अलग रही और उसी के अनुरूप बजट में नीतिगत फैसले लिए गए। इनमें से कुछ बजट ऐसे रहे जिन्होंने देश की अर्थव्यवस्था की दिशा और दशा दोनों बदल दी। यही...

बिजनेस डेस्कः भारत 1947 में आजाद हुआ और तब से देश में अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकारें रहीं। हर सरकार की आर्थिक विचारधारा अलग रही और उसी के अनुरूप बजट में नीतिगत फैसले लिए गए। इनमें से कुछ बजट ऐसे रहे जिन्होंने देश की अर्थव्यवस्था की दिशा और दशा दोनों बदल दी। यही वजह है कि 1947, 1951, 1957, 1968, 1973, 1991, 2005, 2017 और 2020 के बजट आज भी याद किए जाते हैं।

बजट 1947: आजाद भारत का पहला बजट

आजादी के बाद भारत का पहला बजट देश के पहले वित्त मंत्री आर.के. षणमुखम चेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को पेश किया था। यह बजट 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 की अवधि के लिए था। उस समय सरकार के सामने पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों के पुनर्वास की बड़ी चुनौती थी, जिसके समाधान के लिए इस बजट में विशेष प्रावधान किए गए।

बजट 1950: योजना आयोग की नींव

लोकतांत्रिक भारत का पहला पूर्ण बजट वित्त मंत्री जॉन मथाई ने 28 फरवरी 1950 को पेश किया। इसी बजट से योजना आयोग की स्थापना का रास्ता साफ हुआ। पहली बार बजट की विस्तृत प्रति पेश की गई और 1.21 लाख रुपए से अधिक आय वालों पर ‘सुपर टैक्स’ लगाया गया।

बजट 1957: लाइसेंस राज की मजबूती

जवाहरलाल नेहरू सरकार के दौरान वित्त मंत्री टी.टी. कृष्णामाचारी ने 15 मई 1957 को बजट पेश किया। इसमें आयात लाइसेंस अनिवार्य किया गया, वेल्थ टैक्स लगाया गया और एक्साइज ड्यूटी में 400 फीसदी तक का इजाफा हुआ था। इस बजट ने सरकारी नियंत्रण को और मजबूत किया।

बजट 1968: पहला पीपुल-सेंसिटिव बजट

मोरारजी देसाई द्वारा 29 फरवरी 1968 को पेश किए गए इस बजट को भारत का पहला जन-संवेदनशील बजट कहा जाता है। इसमें सेल्फ असेसमेंट सिस्टम लागू किया गया और फैक्ट्री गेट पर स्टैम्पिंग जैसी बाध्यताएं हटाईं गईं, जिससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा प्रोत्साहन मिला।

बजट 1973: राष्ट्रीयकरण का दौर

वित्त मंत्री यशवंतराव बी. चव्हाण ने 28 फरवरी 1973 को बजट पेश किया। इसमें कोयला खदानों, जनरल इंश्योरेंस कंपनियों और इंडियन कॉपर कॉरपोरेशन के राष्ट्रीयकरण के लिए 56 करोड़ रुपए उपलब्ध करवाए गए। यह खनन क्षेत्र का सबसे बड़ा सुधार माना गया। कोयले के खदानों के राष्ट्रीयकरण की वजह से वित्त वर्ष 1973-74 में बजट में अनुमानित घाटा 550 करोड़ रुपए रहा था। यह खदान क्षेत्र का सबसे बड़ा सुधार था।

बजट 1991: आर्थिक सुधारों की शुरुआत

24 जुलाई 1991 को वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने भारत का सबसे क्रांतिकारी बजट पेश किया। इसी बजट से उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) की शुरुआत हुई। लाइसेंस राज खत्म हुआ और भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया के लिए खुल गई।

बजट 2005: आम आदमी का बजट

वित्त मंत्री पी. चिदंबरम का 2005 का बजट ‘आम आदमी का बजट’ कहलाया। इसमें कॉरपोरेट टैक्स और कस्टम ड्यूटी घटाई गई। साथ ही मनरेगा और आरटीआई जैसे अहम कानूनों की घोषणा की गई, जिसने ग्रामीण भारत को नई मजबूती दी।

बजट 2017: जीएसटी की नींव

अरुण जेटली द्वारा पेश किया गया यह बजट अप्रत्यक्ष कर सुधारों के लिए ऐतिहासिक रहा। इसी के जरिए जीएसटी लागू हुआ, जिससे देश में ‘एक देश, एक कर’ की अवधारणा साकार हुई।

बजट 2020: नया टैक्स सिस्टम

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020 में अब तक का सबसे लंबा बजट भाषण दिया। इसी बजट में नई पर्सनल इनकम टैक्स रिजीम की शुरुआत की गई, जिससे करदाताओं को वैकल्पिक टैक्स ढांचा मिला।
 

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