I-PAC Raid Case: सुप्रीम कोर्ट में ममता सरकार पर सख्त टिप्पणी, समय मांगने पर उठा सवाल

Edited By Updated: 18 Mar, 2026 06:15 PM

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सुप्रीम कोर्ट में 18 मार्च 2026 को I-PAC रेड मामले की सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र के बीच तीखी बहस देखने को मिली। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील Kapil Sibal ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की।

नेशनल डेस्क: सुप्रीम कोर्ट में 18 मार्च 2026 को I-PAC रेड मामले की सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र के बीच तीखी बहस देखने को मिली। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील Kapil Sibal ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की। यह सुनवाई जस्टिस Prashant Kumar Mishra और जस्टिस N. V. Anjaria की पीठ के समक्ष हुई।

 केंद्र का विरोध, ‘समय बर्बाद करने’ का आरोप

केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने राज्य की मांग का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि पहले ही चार हफ्तों का समय दिया जा चुका है, इसके बावजूद जवाब दाखिल नहीं किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मामले में गंभीर सवाल उठ रहे हैं और जांच एजेंसियों के काम में हस्तक्षेप की कोशिश की जा रही है।

 सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत ने रेड स्थल पर मुख्यमंत्री की मौजूदगी को लेकर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि जो घटनाएं सामने आई हैं, वे “सामान्य या संतोषजनक” नहीं हैं और यह स्थिति असामान्य मानी जाएगी।

राज्य सरकार की दलील

Kapil Sibal ने तर्क दिया कि जांच एजेंसियों को कानून के तहत अधिकार जरूर है, लेकिन जांच करना मौलिक अधिकार की श्रेणी में नहीं आता। उन्होंने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए और समय देने की अपील की। वहीं वरिष्ठ वकील Shyam Divan ने भी समय की मांग की, लेकिन अदालत ने इसे अनावश्यक देरी की कोशिश माना।

ED का पक्ष और विवाद की जड़

Enforcement Directorate (ED) ने पहले ही अदालत में हलफनामा दाखिल कर कहा था कि तलाशी के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। राज्य पुलिस और केंद्रीय बलों के बीच टकराव की आशंका के चलते कार्रवाई रोकनी पड़ी। एजेंसी का कहना है कि तलाशी के दौरान किसी बाहरी व्यक्ति को मौके पर प्रवेश या दस्तावेज ले जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

 क्या है पूरा मामला?

यह विवाद I-PAC कार्यालय और उससे जुड़े लोगों के ठिकानों पर हुई छापेमारी से जुड़ा है। आरोप है कि इस दौरान राज्य सरकार और पुलिस के कुछ अधिकारियों ने जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय करते हुए इसे लंबित रखा है।
 

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