Edited By jyoti choudhary,Updated: 02 May, 2026 01:17 PM

खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव और संभावित युद्ध के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है, जिसका सीधा असर भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर पड़ा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कंपनियों ने सरकार...
बिजनेस डेस्कः खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव और संभावित युद्ध के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है, जिसका सीधा असर भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर पड़ा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कंपनियों ने सरकार से पेट्रोल-डीजल और घरेलू एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी की मांग की है।
गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (Crude Oil) 126 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (IOC, BPCL, HPCL) जैसी कंपनियों का घाटा और बढ़ गया है। यह स्थिति मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बढ़ी अनिश्चितता के कारण बनी है, जो दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर सख्ती और नौसैनिक नाकेबंदी के संकेतों के बाद बाजार में अस्थिरता और बढ़ गई है, जिससे सप्लाई बाधित होने की आशंका गहरा गई है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से ओएमसी कंपनियों को पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस और विमान ईंधन (ATF) की बिक्री पर भारी नुकसान हो रहा है।
कीमतों में तेज बढ़ोतरी
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाल के महीनों में ईंधन कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है—
- डीजल की कीमतें फरवरी की तुलना में 119% तक बढ़ीं
- पेट्रोल में करीब 69% की बढ़ोतरी
- एलपीजी की कीमतें 40% से अधिक बढ़ीं
- एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) लगभग दोगुना महंगा हुआ
भारत में स्थिति
भारत में अभी तक आम जनता के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें अप्रैल 2022 से स्थिर रखी गई हैं, जबकि कमर्शियल एलपीजी और एटीएफ की कीमतों में बढ़ोतरी हो चुकी है।
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सरकार का रुख
पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार बेहद अस्थिर हैं लेकिन फिलहाल सरकार का प्रयास है कि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। इसलिए तुरंत खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना को फिलहाल टाल दिया गया है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर खाड़ी क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय है। ऐसे में या तो उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ेगा या सरकार को भारी सब्सिडी देनी पड़ेगी, जिससे राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है।