दालों के आयात में 34% की भारी गिरावट, घरेलू उत्पादन का असर

Edited By Updated: 22 May, 2026 01:36 PM

massive 34 decline in pulses imports impact of domestic production

देश में दालों के मजबूत घरेलू उत्पादन और कमजोर मांग के चलते वित्त वर्ष 2025-26 में दालों के आयात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में दालों का आयात मूल्य के आधार पर 34 प्रतिशत घटकर 3.63 अरब डॉलर रह...

नई दिल्लीः देश में दालों के मजबूत घरेलू उत्पादन और कमजोर मांग के चलते वित्त वर्ष 2025-26 में दालों के आयात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में दालों का आयात मूल्य के आधार पर 34 प्रतिशत घटकर 3.63 अरब डॉलर रह गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह रिकॉर्ड 5.54 अरब डॉलर था। मात्रा के लिहाज से भी दाल आयात 12 प्रतिशत घटकर 60 लाख टन रह गया, जो एक वर्ष पहले 73.4 लाख टन था।

व्यापार सूत्रों के मुताबिक वैश्विक बाजार में दालों की कीमतों में भारी गिरावट और घरेलू स्तर पर पर्याप्त उत्पादन के कारण आयात में कमी आई है। हालांकि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का अब तक दाल आयात पर बड़ा असर नहीं पड़ा है, लेकिन आने वाले समय में मानसून की स्थिति घरेलू उत्पादन और आयात की जरूरत तय करेगी। मौसम विभाग द्वारा सामान्य से कम बारिश की आशंका जताए जाने के कारण सरकार और कारोबारियों की नजर खरीफ उत्पादन पर बनी हुई है।

वैश्विक बाजार में कीमतों में 30 से 40 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया से आयात होने वाली येलो पीज की कीमतें घटकर लगभग 300 डॉलर प्रति टन रह गई हैं, जबकि एक वर्ष पहले यह करीब 400 डॉलर प्रति टन थीं। इसी तरह चना दाल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें भी 650-670 डॉलर प्रति टन से घटकर 530 डॉलर प्रति टन पर आ गई हैं।

इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन के सचिव सतीश उपाध्याय ने कहा कि सरकार के पास पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है, इसलिए फिलहाल आयात पर संकट का असर नहीं दिख रहा है। हालांकि भविष्य में आयात की मात्रा घरेलू उत्पादन की स्थिति पर निर्भर करेगी।

वित्त वर्ष 2025-26 में येलो पीज और मसूर दाल के आयात में क्रमशः 47 प्रतिशत और 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं उड़द और अरहर के आयात में क्रमशः 25 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। कुल आयात में अरहर की हिस्सेदारी सबसे अधिक 25 प्रतिशत रही, जबकि मसूर, येलो पीज और उड़द का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।

देश अपनी कुल दाल खपत का लगभग 18 से 20 प्रतिशत हिस्सा कनाडा, रूस, ब्राजील, म्यांमार और अफ्रीकी देशों से आयात करता है। घरेलू आपूर्ति मजबूत रखने के लिए केंद्र सरकार ने अरहर और उड़द के शुल्क-मुक्त आयात की अवधि मार्च 2027 तक बढ़ा दी है। वहीं येलो पीज पर 30 प्रतिशत और मसूर पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क जारी रहेगा।

सरकारी एजेंसियों के पास मई की शुरुआत तक लगभग 26.9 लाख टन दालों का बफर स्टॉक मौजूद था। इसमें चना, अरहर, मसूर, मूंग और उड़द शामिल हैं। वर्ष 2025-26 में देश का कुल दाल उत्पादन 2.386 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जिसमें चना का योगदान सबसे अधिक 45 प्रतिशत है।
 

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