Edited By jyoti choudhary,Updated: 09 Mar, 2026 05:27 PM

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर लगातार दिखाई दे रहा है। बीते छह कारोबारी सत्रों में बाजार में करीब 6% की गिरावट आ चुकी है। इस दौरान सेंसेक्स लगभग 4,700 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी करीब 1,500 अंक फिसल चुका है। इस गिरावट से...
बिजनेस डेस्कः पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर लगातार दिखाई दे रहा है। बीते छह कारोबारी सत्रों में बाजार में करीब 6% की गिरावट आ चुकी है। इस दौरान सेंसेक्स लगभग 4,700 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी करीब 1,500 अंक फिसल चुका है। इस गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में करीब 27 लाख करोड़ रुपए की कमी आ गई है।
सोमवार को भी भारी उतार-चढ़ाव
सोमवार के कारोबार में भी बाजार पर दबाव बना रहा। एक समय सेंसेक्स में करीब 2,500 अंकों तक की गिरावट देखने को मिली थी। हालांकि दिन के अंत तक कुछ रिकवरी आई और सेंसेक्स 1,352.74 अंक गिरकर 77,566.16 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी में भी दिन के दौरान 762 अंकों तक गिरावट आई लेकिन बाद में संभलते हुए यह 422.40 अंक टूटकर 24,028.05 पर बंद हुआ।
कच्चे तेल की कीमतों का बड़ा असर
विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ा है। जब कच्चे तेल का भाव करीब 30% उछलकर 119 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, तब बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। बाद में तेल की कीमतें करीब 16 डॉलर गिरकर 103 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आईं, जिससे बाजार में कुछ रिकवरी देखने को मिली।
सेंसेक्स 11 महीने के निचले स्तर पर
सोमवार को गिरावट के बावजूद बाजार बंद होने तक सेंसेक्स 11 महीनों के निचले स्तर पर रहा। इससे पहले यह स्तर अप्रैल 2025 में देखा गया था। 26 फरवरी के बाद से सेंसेक्स लगातार दबाव में है और तब से अब तक इसमें करीब 5.7% की गिरावट आ चुकी है।
निफ्टी भी 9 महीने के निचले स्तर पर
निफ्टी में भी पिछले छह कारोबारी दिनों में करीब 6% की गिरावट दर्ज की गई है। सोमवार को यह 24,028 के स्तर पर बंद हुआ, जो करीब 9 महीनों का निचला स्तर है। इससे पहले निफ्टी मई 2025 में इस स्तर पर बंद हुआ था।
निवेशकों को भारी नुकसान
बाजार में आई इस गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा है। केवल सोमवार को ही निवेशकों को करीब 8.5 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। वहीं 26 फरवरी से अब तक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का कुल मार्केट कैप करीब 27 लाख करोड़ रुपए घट चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।