3 साल बाद Mutual Fund बने नेट सेलर, फरवरी में ₹4,100 करोड़ की बिकवाली

Edited By Updated: 16 Feb, 2026 12:24 PM

mutual funds turn net sellers after 3 years selling 4 100 crore in february

फरवरी में अब तक म्यूचुअल फंडों ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 4,100 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं। यह लगातार खरीदारी करने वाले म्यूचुअल फंडों द्वारा पिछले तीन सालों में पहली बार है, जब वे शुद्ध रुप से बिकवाल बने हैं।

बिजनेस डेस्कः फरवरी में अब तक म्यूचुअल फंडों ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 4,100 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं। यह लगातार खरीदारी करने वाले म्यूचुअल फंडों द्वारा पिछले तीन सालों में पहली बार है, जब वे शुद्ध रुप से बिकवाल बने हैं। 

इससे पहले अप्रैल 2023 में म्यूचुअल फंडों ने 4,532 करोड़ रुपए से अधिक की शुद्ध बिकवाली की थी। उसके बाद 34 महीनों तक वे लगातार शेयरों की शुद्ध खरीदारी करते रहे। जनवरी में ही उन्होंने 42,355 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे थे और 2025 के दौरान कुल मिलाकर करीब 4.93 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया था।

बिकवाली के पीछे क्या वजह?

विशेषज्ञों का कहना है कि यह रिडेम्पशन के दबाव की वजह से नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग का हिस्सा है।

DR Choksey FinServ के प्रबंध निदेशक देवेन चोकसे के मुताबिक, फंड मैनेजर कमजोर प्रदर्शन करने वाले शेयरों से निकलकर बेहतर गुणवत्ता वाले, खासकर लार्ज-कैप शेयरों में निवेश बढ़ा रहे हैं।

वहीं Anand Rathi Wealth के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी फिरोज अजीज का कहना है कि 40 लाख करोड़ रुपए से अधिक एसेट मैनेजमेंट वाले इस सेक्टर के लिए 4,100 करोड़ रुपए की बिक्री बहुत बड़ी नहीं मानी जानी चाहिए। यह कुछ चुनिंदा योजनाओं या स्टॉक्स में की गई रणनीतिक कार्रवाई भी हो सकती है।

इंडेक्स रीबैलेंसिंग का असर

31 जनवरी को National Stock Exchange of India (NSE) इंडेक्स की समीक्षा हुई थी, जबकि फरवरी की शुरुआत में MSCI ने भी अपने इंडेक्स में बदलाव की घोषणा की। ऐसे में इंडेक्स रीबैलेंसिंग के चलते फंडों ने कुछ शेयरों में खरीद-फरोख्त की हो सकती है।

विश्लेषकों के अनुसार अब यह देखना अहम होगा कि इक्विटी फंडों में निवेश का प्रवाह बना रहता है या नहीं। यदि निवेशकों की ओर से लगातार निकासी होती है और फंड बिकवाली जारी रखते हैं, तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।

बाजार पर क्या असर?

The Wealth Company के बाजार रणनीति प्रमुख अक्षय चिंचलकर का मानना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और कृषि जिंसों से जुड़े बदलाव भी निवेश के रुख को प्रभावित कर सकते हैं। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों की रुचि गोल्ड ETF, बॉन्ड फंड और हाइब्रिड फंड में भी बढ़ी है।

बाजार में कमजोरी का अंतर साफ नजर आ रहा है। Nifty 500 अपने 52-सप्ताह के उच्च स्तर से करीब 3.4% नीचे है लेकिन इस इंडेक्स की लगभग आधी कंपनियां अपने 52-सप्ताह के हाई से 20% से अधिक नीचे कारोबार कर रही हैं।

विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बीच-बीच में दिख रही है लेकिन स्थायी निवेश के लिए आकर्षक वैल्यूएशन और रुपए की स्थिरता अहम होगी। फिलहाल रुपया अपने निचले स्तरों के करीब बना हुआ है, जिससे बाजार में सतर्कता का माहौल कायम है।
 

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