Edited By jyoti choudhary,Updated: 05 Feb, 2026 05:56 PM

गुरुवार (5 फरवरी) को दलाल स्ट्रीट पर जबरदस्त बिकवाली का दबाव देखने को मिला और सेंसेक्स एक्सपायरी के दिन बाजार ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया। कारोबार की शुरुआत से ही कमजोरी बनी रही और दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। इस...
बिजनेस डेस्कः गुरुवार (5 फरवरी) को दलाल स्ट्रीट पर जबरदस्त बिकवाली का दबाव देखने को मिला और सेंसेक्स एक्सपायरी के दिन बाजार ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया। कारोबार की शुरुआत से ही कमजोरी बनी रही और दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। इस दौरान निवेशकों की कुल संपत्ति करीब ₹2.45 लाख करोड़ घट गई, जिससे बाजार में सतर्कता और घबराहट का माहौल बन गया।
कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 503.76 अंक टूटकर 83,313.93 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 133.20 अंक गिरकर 25,642.80 के स्तर पर आ गया। मिडकैप इंडेक्स दिन के निचले स्तर से थोड़ी रिकवरी जरूर दिखा सका लेकिन कुल मिलाकर बाजार की धारणा कमजोर बनी रही।
निवेशकों की दौलत में ₹2.52 लाख करोड़ की गिरावट
एक कारोबारी दिन पहले यानी 04 फरवरी 2025 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,69,16,207.26 करोड़ था। आज यानी 05 फरवरी को इक्विटी मार्केट का कारोबार बंद होने पर यह ₹4,66,70,600.01 करोड़ पर आ गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी ₹245,607.25 करोड़ घट गई है।
एशियाई बाजारों में गिरावट
कमजोर वैश्विक संकेतों ने घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ाया। एशियाई बाजारों में तेज गिरावट रही, जहां दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 4 फीसदी और जापान का निक्केई लगभग 1 फीसदी गिरा। इससे पहले अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी रही और नैस्डैक करीब 1.5 फीसदी फिसला। टेक शेयरों में बिकवाली की बड़ी वजह एआई सेक्टर में बढ़ती लागत और ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर चिंता रही, जिससे वैश्विक निवेशक मुनाफावसूली की ओर झुकते नजर आए।
घरेलू स्तर पर तीसरी तिमाही के नतीजे भी निवेशकों का भरोसा मजबूत नहीं कर पाए। कई कंपनियों के परिणाम उम्मीद से कमजोर रहे, जिससे बाजार में निराशा दिखी। बजट और भारत-अमेरिका ट्रेड डील से जुड़ी सकारात्मक खबरें पहले ही कीमतों में शामिल हो चुकी थीं, ऐसे में अब फोकस फिर से कंपनियों की कमाई और वैल्यूएशन पर लौट आया है। खासकर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर चिंता बढ़ती दिखी।
RBI की MPC बैठक के नतीजों से पहले निवेशक सतर्क
इसके अलावा आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक के नतीजों से पहले निवेशक सतर्क रहे। भले ही ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है लेकिन ग्रोथ, महंगाई और लिक्विडिटी को लेकर केंद्रीय बैंक के संकेत बाजार के लिए अहम रहेंगे। वहीं डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया और विदेशी निवेशकों की खरीदारी पर ब्रेक लगता नजर आया।