Edited By jyoti choudhary,Updated: 03 Sep, 2026 06:08 PM

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर एस. सी. मुर्मू ने बृहस्पतिवार को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से यह सुनिश्चित करने को कहा कि कर्ज वृद्धि में तेजी संपत्ति की गुणवत्ता से समझौते की कीमत पर न आए। मुर्मू ने उद्योग मंडल भारतीय
मुंबईः भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर एस. सी. मुर्मू ने बृहस्पतिवार को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से यह सुनिश्चित करने को कहा कि कर्ज वृद्धि में तेजी संपत्ति की गुणवत्ता से समझौते की कीमत पर न आए। मुर्मू ने उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक कार्यक्रम में एनबीएफसी को नकदी प्रबंधन, उचित व्यवहार, शिकायत निवारण और जिम्मेदार ऋण वितरण पर भी ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा, ''जैसे-जैसे कर्ज वृद्धि तेज होती है, संपत्ति की गुणवत्ता पर जोखिम भी बढ़ता है... वृद्धि कभी भी ऋण मंजूरी के मानकों की कीमत पर नहीं होनी चाहिए।''
डिप्टी गवर्नर ने एनबीएफसी से कठोर दबाव परीक्षण, शुरुआती चेतावनी प्रणाली और गतिशील प्रावधान व्यवस्था अपनाने को कहा। उन्होंने कर्जदारों पर दबाव के शुरुआती संकेतों का पता लगाने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) और मशीन लर्निंग आधारित उपकरणों में निवेश की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि एनबीएफसी और आवास वित्त कंपनियां (एचएफसी) वित्तीय व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। एनबीएफसी का कर्ज अब मौजूदा कीमतों पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 16.7 प्रतिशत से अधिक है, जो एक साल पहले 15.9 प्रतिशत था। यह अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के कुल कर्ज का करीब 27 प्रतिशत है, जो एक साल पहले 26 प्रतिशत था।
मुर्मू ने मजबूत संचालन व्यवस्था और संस्थागत संस्कृति की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि निदेशक मंडलों और वरिष्ठ प्रबंधन को निरंतर अनुपालन तथा नैतिकता की संस्कृति विकसित करनी चाहिए। उन्होंने बढ़ते डिजिटलीकरण के बीच साइबर सुरक्षा और ग्राहक संरक्षण पर भी ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि शिकायत निवारण और जिम्मेदार ऋण वितरण आरबीआई की 'शीर्ष प्राथमिकताएं' हैं। इस सम्मेलन में हीरो फिनकॉर्प के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक अभिमन्यु मुंजाल ने एनबीएफसी की बैंकों पर निर्भरता कम करने के लिए बॉन्ड और पास-थ्रू सर्टिफिकेट बाजार को विकसित करने तथा बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के नियमों की समीक्षा की वकालत की।