कच्चे तेल की ‘आग’ से तेल कंपनियां झुलसीं, पेट्रोल पर ₹20 और डीजल पर ₹100 प्रति लीटर नुकसान

Edited By Updated: 24 Apr, 2026 01:30 PM

oil companies are incurring losses of 20 per liter on petrol and 100 per liter

पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव का असर अब भारतीय तेल कंपनियों पर दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर भारी घाटा उठा रही हैं।

बिजनेस डेस्कः पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव का असर अब भारतीय तेल कंपनियों पर दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर भारी घाटा उठा रही हैं।

 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कंपनियों को डीजल पर करीब ₹100 प्रति लीटर और पेट्रोल पर लगभग ₹20 प्रति लीटर का नुकसान (अंडर-रिकवरी) हो रहा है। इसके बावजूद कंपनियों ने आम उपभोक्ताओं को राहत देते हुए ईंधन की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है।

कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, कच्चे तेल की औसत कीमत पिछले साल के 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर इस महीने 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर तेल कंपनियों के मुनाफे पर पड़ा है। फिलहाल सरकार और तेल कंपनियां मिलकर इस अतिरिक्त बोझ को खुद वहन कर रही हैं।

कीमत बढ़ने की अटकलों पर सरकार का खंडन

हाल ही में यह खबर सामने आई थी कि चुनावों के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹25-₹28 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि सरकार ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है और ये अफवाहें भ्रामक हैं।

सरकार के राहत कदम

महंगाई को काबू में रखने के लिए सरकार ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में ₹10 प्रति लीटर की कटौती की है। इसके अलावा डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल के निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है, ताकि घरेलू आपूर्ति बनी रहे। कच्चे तेल उत्पादकों पर विंडफॉल टैक्स भी लागू किया गया है।

भारत के लिए क्यों गंभीर है स्थिति?

भारत अपनी करीब 88% कच्चे तेल की जरूरत आयात करता है। ऐसे में कीमतों में उछाल सीधे देश के आयात बिल और महंगाई पर असर डालता है। ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से भारत का आयात खर्च रोजाना 190 से 210 मिलियन डॉलर तक बढ़ सकता है। 

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