Edited By jyoti choudhary,Updated: 20 Apr, 2026 06:14 PM

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) भारत में सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय लॉन्ग-टर्म निवेश विकल्पों में से एक है। यह योजना सरकार द्वारा संचालित होती है, जिसमें निवेशकों को सुरक्षित और टैक्स-फ्री रिटर्न मिलता है। इसमें हर साल न्यूनतम 500 रुपए और अधिकतम 1.5 लाख...
बिजनेस डेस्कः पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) भारत में सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय लॉन्ग-टर्म निवेश विकल्पों में से एक है। यह योजना सरकार द्वारा संचालित होती है, जिसमें निवेशकों को सुरक्षित और टैक्स-फ्री रिटर्न मिलता है। इसमें हर साल न्यूनतम 500 रुपए और अधिकतम 1.5 लाख रुपए तक निवेश किया जा सकता है, जबकि इसकी लॉक-इन अवधि 15 साल की होती है।
हालांकि, कई बार अचानक पैसों की जरूरत या अन्य निवेश के आकर्षण में लोग अपना पीपीएफ खाता समय से पहले बंद करने का फैसला कर लेते हैं लेकिन ऐसा करने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
PPF की सबसे बड़ी खासियत इसकी सरकारी गारंटी और टैक्स-फ्री रिटर्न है। यदि कोई निवेशक समय से पहले खाता बंद करता है, तो वह लंबे समय तक मिलने वाले चक्रवृद्धि ब्याज (कंपाउंडिंग) के फायदे से वंचित हो जाता है।
समय से पहले खाता बंद करने पर नुकसान
नियमों के अनुसार, पीपीएफ खाता सामान्य तौर पर 15 साल के बाद ही मैच्योर होता है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों—जैसे गंभीर बीमारी या उच्च शिक्षा—में 5 साल के बाद समय से पहले खाता बंद करने की अनुमति दी जाती है लेकिन इस सुविधा के साथ पेनल्टी भी जुड़ी होती है। समय से पहले खाता बंद करने पर जमा अवधि के दौरान मिलने वाले ब्याज में 1% की कटौती कर दी जाती है।
उदाहरण के तौर पर, अगर आपको 7.1% ब्याज मिल रहा था, तो समय से पहले निकासी पर इसे घटाकर 6.1% के आधार पर गणना की जाएगी।
यह 1% की कटौती देखने में भले ही छोटी लगे लेकिन लंबे समय में जमा फंड पर इसका असर काफी बड़ा होता है और निवेशक को लाखों रुपए का नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, भविष्य में मिलने वाले कंपाउंडिंग के फायदे भी खत्म हो जाते हैं।
इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पीपीएफ खाता केवल बेहद जरूरी परिस्थितियों में ही समय से पहले बंद करें, ताकि निवेश का पूरा लाभ मिल सके।