Edited By jyoti choudhary,Updated: 11 Apr, 2026 04:38 PM

पश्चिम एशिया में तनाव भले फिलहाल कम होता दिख रहा हो लेकिन ऊर्जा आपूर्ति को लेकर खतरा अभी भी बरकरार है। Oil and Natural Gas Corporation (ONGC) के चेयरमैन और सीईओ अरुण कुमार सिंह ने भारत को आगाह करते हुए कहा है कि तेल और गैस की हर बूंद अब बेहद कीमती...
बिजनेस डेस्कः पश्चिम एशिया में तनाव भले फिलहाल कम होता दिख रहा हो लेकिन ऊर्जा आपूर्ति को लेकर खतरा अभी भी बरकरार है। Oil and Natural Gas Corporation (ONGC) के चेयरमैन और सीईओ अरुण कुमार सिंह ने भारत को आगाह करते हुए कहा है कि तेल और गैस की हर बूंद अब बेहद कीमती हो चुकी है और देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से कदम उठाने होंगे।
दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि यह मान लेना अब सही नहीं होगा कि खाड़ी देशों से भारत को हमेशा आसानी से ऊर्जा मिलती रहेगी। उनके मुताबिक, संकट के समय कोई भी देश मदद के लिए आगे नहीं आता, इसलिए भारत को अपने घरेलू संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना होगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट से बढ़ी चिंता
Strait of Hormuz में पिछले दो महीनों से बनी बाधित स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है। दुनिया की करीब 20% तेल और गैस सप्लाई इसी मार्ग से गुजरती है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है।
भारत पर इसका असर अधिक गंभीर है क्योंकि:
- देश अपने 88% कच्चे तेल के लिए आयात पर निर्भर है, जिसमें करीब 40% होर्मुज मार्ग से आता है
- प्राकृतिक गैस का 50% आयात, जिसमें 55-60% LNG इसी रास्ते से
- LPG का 60% आयात, जिसमें लगभग 90% सप्लाई होर्मुज से
खाड़ी देशों पर अत्यधिक निर्भरता बना जोखिम
ONGC प्रमुख ने चेताया कि खाड़ी देशों पर अत्यधिक निर्भरता अब जोखिम भरी हो गई है। क्षेत्र में बढ़ते वैचारिक और राजनीतिक मतभेद भविष्य में बार-बार संकट पैदा कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक हथियारों जैसे ड्रोन और मिसाइलों के जरिए रिफाइनरियों को निशाना बनाना आसान हो गया है, जिससे सप्लाई अचानक ठप हो सकती है।
ONGC प्रमुख के सुझाव
- देश में तेल, गैस और कोयले के घरेलू उत्पादन को तेजी से बढ़ाया जाए
- आपातकालीन भंडार (Strategic Reserves) को मजबूत किया जाए
- मिडिल ईस्ट पर निर्भरता घटाकर अन्य देशों और ऊर्जा स्रोतों की तलाश की जाए
वर्तमान स्थिति और असर
आपूर्ति में रुकावट के चलते भारत को कुछ उद्योगों के लिए गैस और LPG की सप्लाई में कटौती करनी पड़ी है, ताकि घरेलू और जरूरी क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा सके। सरकार अब गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल खोज और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान बढ़ा रही है।
ONGC प्रमुख अरुण कुमार सिंह के शब्दों में, “अगर हमें पहले से इस तरह के संकट का अंदाजा होता, तो ऊर्जा निवेश के फैसले अलग होते। अब वक्त है कि हम हर बूंद का अधिकतम उपयोग करें।”