पेट्रोल, डीजल मार्जिन पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर से पार

Edited By Updated: 22 Jun, 2026 04:15 PM

petrol diesel margins surpass pre west asia conflict levels

सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियों के लाभ में सुधार की उम्मीद है। इसका कारण कच्चे तेल की घटती कीमतों से ईंधन विपणन मार्जिन में होने वाला सुधार है। हालांकि, बढ़ते कर्ज और ईंधन कर को लेकर अनिश्चितता इस क्षेत्र की लंबी अवधि की कमाई की संभावनाओं को सीमित...

नई दिल्लीः सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियों के लाभ में सुधार की उम्मीद है। इसका कारण कच्चे तेल की घटती कीमतों से ईंधन विपणन मार्जिन में होने वाला सुधार है। हालांकि, बढ़ते कर्ज और ईंधन कर को लेकर अनिश्चितता इस क्षेत्र की लंबी अवधि की कमाई की संभावनाओं को सीमित कर सकती है। जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी रिफाइनरियों और खुदरा ईंधन विक्रेताओं के पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर संयुक्त मार्जिन अब हाल के पश्चिम एशिया संघर्ष से पहले के स्तर से ऊपर है। इसका कारण कच्चे तेल की कम कीमतें और केंद्रीय उत्पाद शुल्क में कटौती है। 

पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने से वैश्विक तेल की कीमतों में उछाल आया, लेकिन देश में पेट्रोल पंप पर ईंधन की खुदरा कीमतें काफी हद तक स्थिर रहीं। इसमें वृद्धि जरूरी बढ़ोतरी के मुकाबले बहुत कम रही। मई में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद भी, पेट्रोल पंप पर ईंधन के दाम लागत से कम थे। जेपी मॉर्गन ने कहा, ''पेट्रोल और डीजल पर पेट्रोलियम विपणन कंपनियों के संयुक्त मार्जिन के लिए हमारे अनुमान अब युद्ध-पूर्व स्तर से अधिक हैं। एलपीजी पर नुकसान अब भी अधिक है, लेकिन जल्द ही तेल की कीमतों के साथ इसमें भी कमी आनी चाहिए।'' 

रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में कमाई पर माल भंडार के स्तर पर नुकसान का असर पड़ सकता है, लेकिन दूसरी तिमाही में लाभ बेहतर होना चाहिए। इसमें कहा गया, ''मार्जिन में इस सुधार को लेकर हमारे उत्साह को दो बातें सीमित करती हैं। पिछले कुछ महीनों में ओएमसी पर काफी कर्ज चढ़ा है। इससे मूल्यांकन प्रभावित हुआ है और लाभ का एक बड़ा हिस्सा उत्पाद शुल्क में कटौती के कारण है। हो सकता है कि सरकार कुछ समय के लिए कर कम रखे, जिससे ओएमसी कर्ज चुका सके। हालांकि, भविष्य में उत्पाद शुल्क बढ़ने का जोखिम बना हुआ है।'' 

सरकार ने मार्च में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में प्रति लीटर 10 रुपये की कटौती की थी ताकि खुदरा कीमतों में तुरंत बढ़ोतरी न हो। जब वैश्विक तेल की कीमतें युद्ध से पहले के स्तर पर आ जाएंगी और स्थिर हो जाएंगी, तो शुल्क को फिर से लगाया जा सकता है। तेल की कीमतें अगर कम होती रहती हैं तो सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों (ओएमसी)... भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (बीपीसीएल), इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल)... में से बीपीसीएल और आईओसी को निकट भविष्य में सबसे अधिक लाभ होने की उम्मीद है।

ब्रोकरेज कंपनी का अनुमान है कि बीपीसीएल और आईओसीएल के लिए मौजूदा संयुक्त पेट्रोल और डीजल मार्जिन संघर्ष से पहले के स्तर से अधिक है, जबकि एचपीसीएल के मार्जिन काफी हद तक तेल की कीमतों में हाल के उछाल से पहले के स्तर पर या उससे ऊपर आ गए हैं। यह सुधार बेहतर संयुक्त रिफाइनिंग और विपणन परिवेश को दिखाता है। अगर कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहती हैं और रिफाइनिंग मार्जिन ऊंचा बना रहता है, बेहतर मार्जिन दूसरी तिमाही से कमाई को सहारा दे सकता है। 

हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में हाल की गिरावट के कारण पहले के बचे माल भंडार के स्तर पर नुकसान की वजह से पहली तिमाही की कमाई पर दबाव बने रहने की संभावना है। विश्लेषकों का यह भी मानना है कि हाल के महीनों में पेट्रोल, डीजल और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की बिक्री पर नुकसान उठाने के बाद तीनों तेल विपणन कंपनियों पर कर्ज का बोझ बढ़ सकता है। हालांकि, एलपीजी पर नुकसान अब भी काफी है लेकिन तेल की कम कीमतों का असर इस क्षेत्र पर पड़ने से नुकसान कम होने की उम्मीद है। 

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