बैंकिंग सेक्टर में बड़े सुधार की तैयारी, सरकार जल्द बनाएगी हाई-पावर्ड कमेटीः निर्मला सीतारमण

Edited By Updated: 17 Aug, 2026 12:54 PM

preparations underway for major banking sector reforms

केंद्र सरकार बैंकिंग सेक्टर में अगले दौर के सुधारों की तैयारी कर रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि सरकार जल्द ही हाई-पावर्ड कमेटी का गठन करेगी, जो 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में बैंकिंग सेक्टर की भूमिका का...

नई दिल्लीः केंद्र सरकार बैंकिंग सेक्टर में अगले दौर के सुधारों की तैयारी कर रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि सरकार जल्द ही हाई-पावर्ड कमेटी का गठन करेगी, जो 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में बैंकिंग सेक्टर की भूमिका का आकलन करेगी।

नई दिल्ली में आयोजित पब्लिक सेक्टर बैंक्स (PSB) कॉन्क्लेव 2026 को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने बैंकिंग सेक्टर के वरिष्ठ अधिकारियों और बैंकर्स से सुधारों को लेकर अपने सुझाव और सिफारिशें देने की अपील की। उन्होंने कहा कि दो दिवसीय कॉन्क्लेव में सामने आने वाले सुझावों और निष्कर्षों को प्रस्तावित कमेटी के सामने रखा जाएगा।

बैंकर्स से मांगे गए सुझाव

निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रस्तावित कमेटी कॉन्क्लेव से सामने आने वाली सिफारिशों पर विचार करेगी और अपनी रिपोर्ट में आगे के सुधारों को लेकर सुझाव देगी। उन्होंने कहा कि भारत की 2047 तक की विकास यात्रा के लिए बैंकिंग व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है और इसमें बैंकर्स की भूमिका अहम होगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के पास विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में काम करने के लिए अब 20 साल से भी कम समय बचा है। ऐसे में बैंकिंग सेक्टर की भूमिका और उसकी भविष्य की जरूरतों पर चर्चा करने के लिए यह सही समय है।

बैंकों का NPA ऐतिहासिक निचले स्तर पर

वित्त मंत्री ने कहा कि भारतीय बैंकों का नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) स्तर अब तक के सबसे निचले स्तर पर है। उन्होंने इसे बैंकिंग सेक्टर के लिए मजबूत आधार बताते हुए कहा कि अब बैंक आगे के सुधारों पर ध्यान दे सकते हैं और आर्थिक विकास में ज्यादा प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।

सात अहम मुद्दों पर चर्चा

वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज (DFS) ने कॉन्क्लेव में चर्चा के लिए सात प्रमुख विषय तय किए हैं। इनमें शामिल हैं:

  • युवाओं के लिए बैंकिंग सेवाएं
  • निवेश चक्र को बढ़ावा देना
  • ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर
  • कृषि और बागवानी वैल्यू चेन का इंफ्रास्ट्रक्चर
  • प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को ऋण
  • क्रेडिट कार्ड कारोबार को नए सिरे से तैयार करना
  • बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करना

वित्त मंत्री ने बताया कि DFS ने पहली बार उनकी मौजूदा अवधि में इन सात विषयों पर विस्तृत रिसर्च डॉक्यूमेंट तैयार किए हैं।

युवा आबादी पर बैंकों को देना होगा ध्यान

सीतारमण ने युवाओं से जुड़े रिसर्च पेपर का खास तौर पर उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की करीब 29 प्रतिशत आबादी 15 से 29 वर्ष के आयु वर्ग में है। ऐसे में बैंकों को देश की युवा आबादी की जरूरतों और अलग-अलग जीवन चरणों को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति तैयार करनी होगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर में पिछले वर्षों में कई महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं और बैंकों की वित्तीय स्थिति भी मजबूत हुई है। अब जरूरत इस बात की है कि बैंक बदलती अर्थव्यवस्था की जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार करें और विकसित भारत के दीर्घकालिक लक्ष्य में प्रभावी योगदान दें।

प्रस्तावित हाई-पावर्ड कमेटी इसी दिशा में बैंकिंग सेक्टर के अगले चरण के सुधारों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव तैयार करेगी।

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