98% फूड सेफ्टी नियमों का पालन फिर भी 34 दिन बंद रही मिठाई की दुकान, बॉम्बे HC ने FDA को लगाई फटकार

Edited By Updated: 17 Aug, 2026 08:29 PM

despite 98 compliance with food safety regulations the sweet shop remained clo

पुणे की एक मिठाई की दुकान को फूड सेफ्टी नियमों का 98 फीसदी पालन करने के बावजूद 34 दिनों तक बंद रखने के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने FDA की कार्रवाई को मनमाना बताते हुए...

नेशनल डेस्क : पुणे की एक मिठाई की दुकान को फूड सेफ्टी नियमों का 98 फीसदी पालन करने के बावजूद 34 दिनों तक बंद रखने के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने FDA की कार्रवाई को मनमाना बताते हुए दुकान का लाइसेंस सस्पेंड करने का आदेश रद्द कर दिया और उसे तुरंत कारोबार शुरू करने की अनुमति दी। कोर्ट ने लंबे समय तक दुकान बंद रखने के लिए FDA को जिम्मेदार ठहराते हुए गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। यह रकम 30 दिनों के भीतर जमा करनी होगी।

दोबारा जांच में मिले 36 में से 35 अंक

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम ए. अंखाड की बेंच गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। दुकान ने अपने फूड लाइसेंस के निलंबन को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। मामले में सबसे अहम बात यह रही कि फूड सेफ्टी से जुड़ी शिकायतों के बाद दुकान की दोबारा जांच की गई। इस जांच में दुकान को 36 में से 35 अंक, यानी करीब 98 फीसदी अनुपालन मिला। इसके बावजूद FDA ने दुकान का लाइसेंस बहाल नहीं किया और कारोबार को दोबारा खोलने की अनुमति नहीं दी।

FDA के तर्क से संतुष्ट नहीं हुआ कोर्ट

FDA की ओर से दलील दी गई कि लाइसेंस सस्पेंशन के खिलाफ दायर आंतरिक अपील लंबित होने के कारण दुकान को दोबारा खोलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। हाई कोर्ट इस तर्क से सहमत नहीं हुआ। बेंच ने FDA के स्पष्टीकरण को कमजोर बताते हुए सवाल उठाया कि जब दोबारा जांच में दुकान ने लगभग सभी निर्धारित मानकों का पालन कर लिया था, तो उसे कारोबार जारी रखने से क्यों रोका गया।  कोर्ट ने टिप्पणी की कि 98 फीसदी अनुपालन हासिल करने के बाद भी कारोबारी को अपील की प्रक्रिया में भेजना समझ से परे है। बेंच ने इसे नागरिकों को परेशान करने वाली प्रक्रिया बताया।

12 जून को सस्पेंड हुआ था लाइसेंस

यह मामला 12 जून से शुरू हुआ, जब फूड पॉइजनिंग की शिकायत और साफ-सफाई से जुड़ी चिंताओं के बाद FDA ने गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स का फूड लाइसेंस सस्पेंड कर दिया था। दुकान ने तीन दिन बाद, 15 जून को इस आदेश को चुनौती दी। इसके बाद 9 जुलाई को दुकान की ओर से FDA को अनुपालन रिपोर्ट सौंपी गई। रिपोर्ट के बाद 13 जुलाई को आधिकारिक तौर पर दोबारा निरीक्षण किया गया। जांच में दुकान को 36 में से 35 अंक मिले। इसके बावजूद FDA ने लाइसेंस बहाल नहीं किया, जिसके कारण दुकान लंबे समय तक बंद रही।

8.5 लाख रुपये के राजस्व नुकसान का दावा

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील अभिजीत देसाई ने कोर्ट को बताया कि दुकान 34 दिनों तक बंद रही, जिससे कारोबार को करीब 8.5 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। हाई कोर्ट ने माना कि खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों को लागू करना FDA की जिम्मेदारी है और शुरुआती कार्रवाई का उद्देश्य भी उचित था। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि दोबारा जांच में 98 फीसदी अनुपालन पाए जाने के बाद भी दुकान को बंद रखना उचित नहीं था।

FDA को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश

बॉम्बे हाई कोर्ट ने FDA को गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स को हुए नुकसान के लिए 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। यह राशि 30 दिनों के भीतर जमा करनी होगी। इसके साथ ही कोर्ट ने दुकान के खिलाफ जारी लाइसेंस सस्पेंशन आदेश को रद्द कर दिया और उसे तत्काल अपना कारोबार शुरू करने की अनुमति दे दी।

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