Edited By jyoti choudhary,Updated: 21 Aug, 2026 01:22 PM
भारत के निजी क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों में जुलाई में चार साल के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद अगस्त में मामूली सुधार देखने को मिला। शुक्रवार को जारी HSBC Flash India PMI सर्वे के मुताबिक, सेवा क्षेत्र की बेहतर ग्रोथ ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की...
नई दिल्लीः भारत के निजी क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों में जुलाई में चार साल के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद अगस्त में मामूली सुधार देखने को मिला। शुक्रवार को जारी HSBC Flash India PMI सर्वे के मुताबिक, सेवा क्षेत्र की बेहतर ग्रोथ ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की धीमी पड़ती रफ्तार की भरपाई की।
S&P Global की ओर से तैयार कंपोजिट PMI अगस्त में बढ़कर 54.6 हो गया, जबकि जुलाई में यह 54.3 था। जुलाई का आंकड़ा 2022 की शुरुआत के बाद सबसे कमजोर स्तर था। हालांकि, अगस्त का स्तर मार्च 2022 के बाद दूसरा सबसे कमजोर आंकड़ा रहा। इसके बावजूद PMI लगातार 61वें महीने 50 से ऊपर बना हुआ है। 50 से ऊपर का आंकड़ा कारोबारी गतिविधियों में विस्तार और 50 से नीचे का आंकड़ा गिरावट को दर्शाता है।
नए ऑर्डर में सुधार लेकिन ग्रोथ की रफ्तार कमजोर
सर्वे के मुताबिक, अगस्त में नए ऑर्डर की ग्रोथ में सुधार हुआ, लेकिन इसकी गति हाल के वर्षों के औसत से कमजोर रही। निजी क्षेत्र की गतिविधियों में सुधार मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन से आया।
जुलाई में सेवा क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों और नए कारोबार की वृद्धि 53 महीनों के सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच गई थी। अगस्त में इसमें सुधार हुआ। इसके विपरीत, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ और धीमी पड़ गई।
Manufacturing PMI गिरा, Services PMI में सुधार
HSBC Flash India Manufacturing PMI जुलाई के 53.5 से घटकर अगस्त में 52.9 रह गया। वहीं, Flash India Services PMI Business Activity Index जुलाई के 53.3 से बढ़कर 54.5 हो गया।
इससे संकेत मिलता है कि अगस्त में निजी क्षेत्र की कुल कारोबारी गतिविधियों को मुख्य रूप से सर्विसेज सेक्टर से सहारा मिला, जबकि मैन्युफैक्चरिंग में उत्पादन और नए ऑर्डर की ग्रोथ कमजोर हुई।
HSBC की भारत की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजल भंडारी के मुताबिक, निजी क्षेत्र के कुल उत्पादन की ग्रोथ मोटे तौर पर स्थिर रही और सर्विसेज सेक्टर की मजबूत गतिविधियों से इसे समर्थन मिला। उन्होंने कहा कि अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ और कमजोर हुई और इसमें सुधार की रफ्तार करीब पांच साल में सबसे धीमी रही।
लागत दबाव घटा लेकिन कंपनियों ने बढ़ाए बिक्री भाव
सर्वे के अनुसार, अगस्त में कंपनियों की इनपुट लागत सात महीनों की सबसे धीमी रफ्तार से बढ़ी। हालांकि, कंपनियों ने ग्राहकों से वसूले जाने वाले अंतिम बिक्री मूल्य में ज्यादा तेजी से बढ़ोतरी की।
इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बड़ा हिस्सा ग्राहकों पर डालने की कोशिश कर रही हैं। वहीं, तैयार माल का स्टॉक ऊंचे स्तर पर बना रहा और कच्चे माल की खरीद की रफ्तार धीमी हुई।
सर्विसेज सेक्टर में बढ़ा रोजगार
सेवा क्षेत्र में गतिविधियां बढ़ने के साथ अगस्त में कुल रोजगार सृजन में भी सुधार हुआ। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कंपनियों ने नए कर्मचारियों की भर्ती की।
सर्वे में बताया गया कि रोजगार में यह सुधार मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र में देखने को मिला, जबकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ढाई साल में पहली बार कर्मचारियों की संख्या में कमी आई।
कुल मिलाकर, अगस्त के PMI आंकड़े बताते हैं कि भारतीय निजी क्षेत्र की गतिविधियों में जुलाई की तुलना में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग में लगातार कमजोर होती ग्रोथ और कुल PMI का अपेक्षाकृत निचला स्तर आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार पर दबाव बने रहने का संकेत देता है।