Edited By Tanuja,Updated: 31 Aug, 2026 07:58 PM

चीन ने राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून में बड़ा बदलाव करते हुए युद्ध या गंभीर सुरक्षा संकट के दौरान नागरिकों, निजी कंपनियों, AI, ड्रोन, डेटा, साइबर क्षमता और अन्य संसाधनों को रक्षा जरूरतों से जोड़ने का ढांचा मजबूत किया है। इसका असर चीन की दीर्घकालिक...
Bejing: चीन ने अपनी राष्ट्रीय रक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए नेशनल डिफेंस मोबिलाइजेशन फ्रेमवर्क को मजबूत करने की दिशा में नया कदम उठाया है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन की शीर्ष विधायिका ने 28 अगस्त को संशोधित नेशनल डिफेंस मोबिलाइजेशन लॉ को मंजूरी दी है, जो 1 अक्टूबर से लागू होने वाला है।
इस संशोधित कानून को चीन की उस रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसके तहत किसी युद्ध या गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा संकट की स्थिति में देश की नागरिक जनशक्ति, निजी कंपनियों, तकनीकी क्षमता, बुनियादी ढांचे और आर्थिक संसाधनों को राष्ट्रीय रक्षा जरूरतों के लिए तेजी से संगठित किया जा सके। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि युद्धकालीन जरूरतों के दौरान AI, ड्रोन, डेटा, साइबर क्षमता और निजी तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल रक्षा व्यवस्था के लिए किया जा सकता है।
क्या है चीन का नया कानून?
रिपोर्टों के मुताबिक, संशोधित कानून चीन को शांति के समय से तेजी से बड़े पैमाने पर युद्धकालीन लामबंदी की स्थिति में जाने के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा उपलब्ध कराता है। इसे 2010 के बाद चीन के राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी ढांचे में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। कानून में 14 अध्याय और 82 अनुच्छेद शामिल बताए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य केवल सेना की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर पूरे समाज की तकनीकी, औद्योगिक और आर्थिक क्षमता को रक्षा जरूरतों के अनुरूप संगठित करना है।
नागरिकों को भी कर लेगा शामिल
रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध या गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा संकट के दौरान बड़ी संख्या में नागरिकों को राष्ट्रीय रक्षा और लॉजिस्टिक्स से जुड़े कार्यों के लिए लामबंद किया जा सकता है। बताया गया है कि कानूनी ढांचे के तहत 18 से 60 वर्ष तक के पुरुषों और 18 से 55 वर्ष तक की महिलाओं को कुछ परिस्थितियों में रक्षा संबंधी कार्यों और सहयोगी जिम्मेदारियों के दायरे में लाया जा सकता है। इसका अर्थ यह है कि युद्ध की स्थिति में चीन केवल अपनी नियमित सेना पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि नागरिक क्षमता को भी व्यापक रक्षा तंत्र से जोड़ने की तैयारी कर रहा है।
AI, ड्रोन और टेक्नोलॉजी पर खास फोकस
चीन के नए ढांचे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और डुअल-यूज टेक्नोलॉजी है।डुअल-यूज टेक्नोलॉजी का मतलब ऐसी तकनीक से है जिसका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। इसमें शामिल हो सकते हैं
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- ड्रोन टेक्नोलॉजी
- डेटा सिस्टम
- साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर
- संचार नेटवर्क
- लॉजिस्टिक्स टेक्नोलॉजी
- उन्नत निर्माण और उत्पादन क्षमता
- युद्ध की स्थिति में इन संसाधनों को राष्ट्रीय रक्षा जरूरतों के अनुसार इस्तेमाल करने के लिए कानूनी व्यवस्था बनाई जा रही है।
हालांकि इसे सीधे तौर पर हर टेक कंपनी पर स्थायी रूप से सेना के कब्जे के रूप में देखना सही नहीं होगा। इसका मूल उद्देश्य जरूरत पड़ने पर नागरिक तकनीकी और औद्योगिक क्षमता को रक्षा तंत्र के साथ तेजी से जोड़ना है।
निजी संसाधनों का भी हो सकता है इस्तेमाल
नए रक्षा लामबंदी ढांचे के तहत सरकार युद्धकालीन जरूरतों के अनुसार निजी और नागरिक संसाधनों का उपयोग कर सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक इसमें
- वाहन
- उपकरण
- इमारतें
- सुविधाएं
- बुनियादी ढांचा
- अन्य आवश्यक संपत्तियां शामिल हो सकती हैं।
सेना और राष्ट्रीय रक्षा जरूरतों के अनुसार इन संसाधनों को इस्तेमाल में लाने के लिए कानूनी प्रावधान किए जा सकते हैं। कानून के तहत रक्षा लामबंदी से जुड़े आदेशों और जिम्मेदारियों को पूरा करने से इनकार करने वाले व्यक्तियों या संगठनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की व्यवस्था भी हो सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, आदेशों में देरी करने या आवश्यक सहयोग नहीं देने पर जुर्माना अथवा अन्य कानूनी कार्रवाई का प्रावधान हो सकता है। इससे स्पष्ट होता है कि चीन युद्धकालीन तैयारी को केवल स्वैच्छिक सहयोग के भरोसे नहीं छोड़ना चाहता।
भारत पर क्या होगा असर?
चीन के इस नए कानून पर भारत की रणनीतिक नजर रहना स्वाभाविक है। भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर लंबे समय से संवेदनशील स्थिति रही है। ऐसी स्थिति में चीन अगर अपनी नागरिक लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन को तेजी से सैन्य जरूरतों के साथ जोड़ने में सक्षम होता है, तो यह उसकी दीर्घकालिक सैन्य क्षमता को मजबूत कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी लंबे संघर्ष में सिर्फ सैनिकों की संख्या महत्वपूर्ण नहीं होती। रसद, सड़कें, संचार, तकनीक, उत्पादन और सप्लाई चेन भी उतनी ही बड़ी भूमिका निभाते हैं। चीन का संशोधित कानून इसी व्यापक क्षमता को एक साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।