न्यूजीलैंड एफटीए की शुल्क रियायतों से सिंगल माल्ट व्हिस्की के निर्यात को मिलेगा बढ़ावा: सीआईएबीसी

Edited By Updated: 28 Apr, 2026 02:47 PM

single malt whisky exports to receive boost from tariff concessions under

न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत भारतीय शराब पर मिलने वाली शुल्क रियायतों से सिंगल माल्ट व्हिस्की के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और द्वीपीय देश में अन्य उत्पादों की कीमत प्रतिस्पर्धात्मकता भी बेहतर होगी। उद्योग संगठन कन्फेडरेशन

नई दिल्लीः न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत भारतीय शराब पर मिलने वाली शुल्क रियायतों से सिंगल माल्ट व्हिस्की के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और द्वीपीय देश में अन्य उत्पादों की कीमत प्रतिस्पर्धात्मकता भी बेहतर होगी। उद्योग संगठन कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनियां (सीआईएबीसी) ने मंगलवार को कहा कि वर्तमान में निर्यात का आधार कम होने के कारण यह समझौता बाजार में प्रवेश और ब्रांड निर्माण में मदद करेगा खासकर व्हिस्की, रम और प्रीमियम भारतीय स्पिरिट जैसे खंडों में। 

संगठन के महानिदेशक अनंत एस. अय्यर ने कहा, ''एफटीए से न्यूजीलैंड में भारतीय 'अल्कोहलिक' (शराब) पेय के निर्यात को शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने की उम्मीद है जिससे वहां भारतीय उत्पादों की कीमत प्रतिस्पर्धात्मकता बेहतर होगी।'' भारत से न्यूजीलैंड को स्पिरिट का निर्यात फिलहाल करीब 10 लाख अमेरिकी डॉलर प्रतिवर्ष है। वर्तमान में कुछ प्रीमियम शराब विशेषकर भारतीय सिंगल माल्ट वहां निर्यात की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि एफटीए लागू होने के बाद भारतीय 'अल्कोबेवरिज' (शराब वाले पेय पदार्थ बनाने वाली) कंपनियां इस बाजार पर अधिक ध्यान देंगी और इसे विकसित करेंगी। हालांकि, न्यूजीलैंड में वाइन और बीयर की खपत अधिक है। अय्यर ने कहा, ''भारतीय शराब पर शुल्क रियायतों के साथ, हमें उम्मीद है कि वैश्विक स्तर पर मशहूर भारतीय सिंगल माल्ट के निर्यात को न्यूजीलैंड में बढ़ावा मिलेगा।'' भारत का न्यूजीलैंड को 'अल्कोबेवरिज' (शराब वाले पेय पदार्थ) निर्यात फिलहाल सीमित है। 2024-25 में बीयर का निर्यात करीब 3.4 लाख डॉलर, व्हिस्की का 1.3 लाख डॉलर और रम का 40,000 डॉलर रहा। 

वोदका और जिन जैसी अन्य श्रेणियां नगण्य हैं जबकि वाइन का निर्यात भी बहुत कम है जिससे कुल व्यापार निम्न स्तर पर बना हुआ है। न्यूजीलैंड में 'अल्कोहलिक' पेय पर मुख्य रूप से वर्तमान में उत्पाद शुल्क लगता है, जो वाइन के मामले में प्रति लीटर उत्पाद और स्पिरिट के मामले में प्रति लीटर अल्कोहल के आधार पर लागू होता है। अय्यर ने कहा कि आयात शुल्क पहले से ही कम हैं लेकिन एफटीए से शुल्क-मुक्त पहुंच और अधिक निश्चितता मिलेगी। हालांकि घरेलू कर और नियामकीय आवश्यकताएं जारी रहेंगी। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर एफटीए से भारत में वाइन आयात में समय के साथ कुछ वृद्धि हो सकती है लेकिन इसका असर धीरे-धीरे दिखेगा। 

अय्यर ने कहा कि भारत में वाइन (घरेलू/आयातित) का बाजार अभी भी स्पिरिट और बीयर की तुलना में छोटा है तथा यह राज्य-स्तरीय करों, वितरण सीमाओं एवं उपभोक्ता जागरूकता पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, ''हमें प्रीमियम वाइन (750 मिली बोतल पर 1,500 रुपए से अधिक कीमत) के आयात में कुछ बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है जो न्यूजीलैंड के वाइन निर्माता वैश्विक स्तर पर निर्यात करते हैं।'' सीआईएबीसी के महानिदेशक ने साथ ही कहा कि न्यूजीलैंड उच्च गुणवत्ता वाली वाइन का उत्पादन करता है और वहां के वाइन उद्योग तथा भारतीय वाइन निर्माताओं के बीच तकनीकी सहयोग से भारतीय उत्पादों के मूल्य में वृद्धि हो सकती है। 

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