Edited By Pardeep,Updated: 28 Apr, 2026 09:51 PM

कश्मीर के पहलगाम में हुए उस खौफनाक आतंकी हमले को याद कर आज भी रूह कांप उठती है, लेकिन नियति का खेल देखिए कि ठीक एक साल बाद उसी तारीख को एक नई जिंदगी ने जन्म लिया है। चिरमिरी के एक व्यापारी परिवार के लिए 22 अप्रैल की तारीख अब सिर्फ दहशत की नहीं,...
नेशनल डेस्क : कश्मीर के पहलगाम में हुए उस खौफनाक आतंकी हमले को याद कर आज भी रूह कांप उठती है, लेकिन नियति का खेल देखिए कि ठीक एक साल बाद उसी तारीख को एक नई जिंदगी ने जन्म लिया है। चिरमिरी के एक व्यापारी परिवार के लिए 22 अप्रैल की तारीख अब सिर्फ दहशत की नहीं, बल्कि असीम सुख की पहचान बन गई है।
22 अप्रैल 2025: जब मौत के तांडव के बीच सुरक्षित बचा था परिवार
पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध फायरिंग की थी, जिसमें 26 मासूम पर्यटकों की जान चली गई थी। उस समय छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले के चिरमिरी निवासी व्यापारी अरविंद अग्रवाल अपनी पत्नी पूजा और बेटी समृद्धि समेत चार परिवारों के 11 लोग वहां मौजूद थे। आतंकियों की गोलियों के बीच वे सभी बाल-बाल बच गए थे।
देवदूत बनकर आए थे नजाकत अली
उस भीषण हमले के दौरान चिरमिरी के इन पर्यटकों के लिए स्थानीय व्यापारी नजाकत अली देवदूत बनकर सामने आए थे। वे हर साल ठंड में चिरमिरी में गर्म कपड़े बेचने आते थे और हमले के वक्त पर्यटकों के साथ ही थे। नजाकत अली ने ही अपनी जान पर खेलकर सभी 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला था।
आतंकी हमले की बरसी पर घर आया 'पहल'
घटना के ठीक एक साल बाद, 22 अप्रैल को अरविंद अग्रवाल के घर पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई है। इस सुखद संयोग की चर्चा पूरे चिरमिरी क्षेत्र में हो रही है। अरविंद का कहना है कि पहलगाम की उस खौफनाक याद से लेकर आज के सुकून भरे पल तक की इस यात्रा को यादगार बनाने के लिए उन्होंने अपने बेटे का नाम 'पहल' रखा है,।
सहमे चेहरों पर लौटी मुस्कान
पहलगाम की उस घटना को याद करते ही अरविंद और उनकी पत्नी आज भी सहम जाते हैं, लेकिन गोद में खेल रहे नन्हे 'पहल' को देखकर उनके चेहरे पर अब सुकून है। परिवार का मानना है कि यह नाम उन्हें हमेशा याद दिलाएगा कि कैसे वे मौत के मुंह से सुरक्षित लौटकर आए थे और अब एक नई 'पहल' के साथ जीवन आगे बढ़ रहा है।