शॉपिंग से ज्यादा ट्रैवल और एक्सपीरियंस पर खर्च कर रहे अमीर, रिपोर्ट में दावा

Edited By Updated: 20 Apr, 2026 12:02 PM

wealthy are spending more on travel and experiences than on shopping

भारत में अमीर वर्ग की खर्च करने की आदतों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब यह वर्ग पारंपरिक रिटेल खरीदारी से हटकर ट्रैवल, लग्जरी डाइनिंग और खास अनुभवों पर ज्यादा खर्च कर रहा है।

बिजनेस डेस्कः भारत में अमीर वर्ग की खर्च करने की आदतों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब यह वर्ग पारंपरिक रिटेल खरीदारी से हटकर ट्रैवल, लग्जरी डाइनिंग और खास अनुभवों पर ज्यादा खर्च कर रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, कुल खर्च बढ़ने के बावजूद रिटेल का हिस्सा घट रहा है। उभरते अमीर वर्ग में जहां लगभग 50% खर्च रिटेल पर होता है, वहीं अत्यधिक संपन्न लोगों में यह घटकर करीब 28% रह जाता है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि उपभोक्ता अब मनोरंजन, यात्रा और लाइफस्टाइल अनुभवों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

ट्रेंड में बदलाव

विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में अमीरी की पहचान केवल आय से नहीं, बल्कि खर्च के तरीके से तय हो रही है। लोग अब कॉन्सर्ट, वेलनेस रिट्रीट और एक्सक्लूसिव इवेंट्स जैसे अनुभवों को अधिक महत्व दे रहे हैं यानी चीजें खरीदने से ज्यादा अनुभव लेने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है।

प्रीमियम खरीदारी में तेजी

हालांकि, प्रीमियम रिटेल की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, हर चार में से तीन संपन्न भारतीय हर तिमाही में कम से कम एक महंगा प्रोडक्ट खरीदते हैं, जबकि लगभग 25% लोग हर दो हफ्ते में प्रीमियम खरीदारी करते हैं। ज्वेलरी और हाई-एंड गैजेट्स पर खर्च में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

इस बदलते ट्रेंड के चलते रिटेल सेक्टर भी खुद को नया रूप दे रहा है। कंपनियां अब केवल उत्पाद बेचने पर नहीं, बल्कि ग्राहकों को एक बेहतर और यादगार अनुभव देने पर जोर दे रही हैं। इसके तहत स्टोर्स में पर्सनलाइज्ड सर्विस, इंटरएक्टिव डिस्प्ले और इमर्सिव माहौल तैयार किया जा रहा है।

मॉल्स बन रहे हैं एक्सपीरियंस हब 

मॉल्स भी अब पारंपरिक शॉपिंग सेंटर से आगे बढ़कर एक्सपीरियंस हब में बदल रहे हैं। यहां गेमिंग, बॉलिंग, लाइव इवेंट्स और फूड एक्सपीरियंस जैसे विकल्प जोड़े जा रहे हैं, ताकि ग्राहक ज्यादा समय बिताएं और बार-बार लौटकर आएं। खासकर युवाओं में इस तरह के अनुभवों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव अस्थायी नहीं, बल्कि दीर्घकालिक है। रिटेल सेक्टर खत्म नहीं हो रहा, बल्कि एक बड़े लाइफस्टाइल इकोसिस्टम का हिस्सा बन रहा है, जहां खरीदारी के साथ-साथ अनुभव भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है।

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