साइबर क्राइम रोकने के लिए पुलिस और बैंक में समन्वय जरूरी : कपूर

Edited By Updated: 26 Sep, 2023 08:10 PM

meeting with private bank officials regarding cyber security

हरियाणा के पुलिस महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने कहा कि साइबर अपराध को रोकने के लिए जरूरी है कि गोल्डन आवर्स की सीमा में काम करते हुए रिस्पांस टाइम को कम करने की दिशा में प्रयास किए जाएं। इस कार्य में जितनी महत्वपूर्ण भूमिका पुलिस विभाग की है, उतनी ही...

चंडीगढ़,(पांडेय): हरियाणा के पुलिस महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने कहा कि साइबर अपराध को रोकने के लिए जरूरी है कि गोल्डन आवर्स की सीमा में काम करते हुए रिस्पांस टाइम को कम करने की दिशा में प्रयास किए जाएं। इस कार्य में जितनी महत्वपूर्ण भूमिका पुलिस विभाग की है, उतनी ही बैंक कर्मियों की भी है। इसके लिए बैंकों और पुलिस विभाग में बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए काम किया जाना अत्यंत आवश्यक है ताकि साइबर अपराध होने पर दोनों एक टीम के रूप में काम करते हुए साइबर अपराध को प्रभावी ढंग से रोक सकें। वह साइबर सुरक्षा को लेकर एच.डी.एफ.सी. बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। 

 

 


बैठक में साइबर पोर्टल के नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोॄटग प्रबंधन प्रणाली मॉड्यूल और साइबर अपराधियों को पकडऩे में आ रही समस्याओं व उनके समाधान को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में उपस्थित एच.डी.एफ.सी. बैंक के अधिकारियों ने भी पुलिस प्रशासन को पूरे सहयोग का आश्वासन दिया। बैठक में ए.डी.जी.पी. साइबर क्राइम ओ.पी. सिंह ने पावर प्वाइंट प्रैजैंटेशन के माध्यम से साइबर सुरक्षा को लेकर आ रही चुनौतियों समेत कई अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में जानकारी दी।
 

 

 

 

बैंक के नोडल अधिकारियों को हैल्पलाइन-1930 पर तैनात टीम के साथ किया जाएगा प्रशिक्षित
कपूर ने कहा कि साइबर अपराध होने पर उसे शुरूआती समयावधि में रोकने की संभावनाएं अपेक्षाकृत अधिक होती हैं, इस अवधि को गोल्डन आवर कहा जाता है। उन्होंने बैठक में उपस्थित बैंक अधिकारियों से कहा कि वे शिकायतों पर तत्परता से कार्रवाई करें और प्रतिक्रिया समय को कम करने के लिए अपने यहां तैनात नोडल अधिकारियों की संख्या बढ़ाएं ताकि अवकाश के दिनों तथा विषम समय में भी निर्धारित एस.ओ.पी. के तहत काम किया जा सके। इन नोडल अधिकारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने तथा रीयल टाइम कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी देने के लिए इनकी पुलिस विभाग की नैशनल साइबर हैल्पलाइन नंबर -1930 की टीम के साथ ट्रेङ्क्षनग करवाई जाएगी ताकि दोनों में अच्छा समन्वय स्थापित हो।
 

 

 

 

साइबर अपराध को अलग-2 श्रेणियों में विभाजित करते हुए किया जाएगा काम 
पुलिस महानिदेशक ने बताया कि साइबर अपराध को रोकने के लिए मामलों को 2 श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा। पहली श्रेणी में लाइव केसेस अर्थात साइबर अपराध संबंधी ऐसे मामलों को रखा जाएगा जिनके घटित होने के तुरंत बाद हैल्पलाइन नंबर पर कॉल रिसीव की जाती है और साइबर अपराधी को आगे की ट्रांजैक्शन करने से रोका जाता है। दूसरी श्रेणी में ऐसे साइबर अपराधों को रखा जाएगा जिन्हें घटित हुए अपेक्षाकृत ज्यादा समय बीत चुका है। इन दोनों श्रेणियों के मामलों का निपटारा करने के लिए अलग-अलग टीमें काम करेंगी। उन्होंने बैंक के अधिकारियों से कहा कि वे बैकलॉग को कम करने के लिए अलग से टीम गठित करें ताकि पुरानी शिकायतों का भी जल्द से जल्द समाधान हो सके। इसके अलावा बैठक में आई.एफ.एस.सी. कोड के वैरीफिकेशन, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बैंक खातों में संदिग्ध लेन देन आदि की मॉनीटरिंग को लेकर भी चर्चा की गई।

 

 

 

इसके अलावा, पुलिस महानिदेशक ने बैठक में उपस्थित बैंक अधिकारियों से कहा कि वे प्वाइंट ऑफ सेल (पी.ओ.एस.) मशीनों को देने से पहले विक्रेता के व्यापार का सत्यापन अवष्य करें ताकि मशीन का उपयोग साइबर अपराधियों द्वारा न किया जा सके। कपूर ने इन मशीनों की जिओफेंसिंग करवाने की आवश्यकता पर भी बल दिया ताकि एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के बाद ये मशीनें स्वत: ही निष्क्रिय हो जाएं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी बैंक खाते में संदिग्ध लेन देन पाया जाता है तो बैंक तुरंत कार्रवाई करना सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में बैंक द्वारा नियुक्त टीम का प्रशिक्षण करवाया जाएगा ताकि 15 अक्तूबर तक सुव्यवस्थित तथा सुनियोजित ढंग से इसका संचालन किया जा सके। अक्तूबर अंत तक दोबारा बैंक अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए कार्य की समीक्षा की जाएगी।

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