Edited By Sarita Thapa,Updated: 24 Sep, 2026 04:33 PM

अनंत चतुदशी का त्योहार भगवान विष्णु की पूजा और भगवान गणेश के विसर्जन के लिए बहुत खास माना जाता है। इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ दाहिने हाथ पर 14 गांठों वाला अनंत सूत्र बांधने की पुरानी परंपरा है।
Anant Chaturdashi Vrat Niyam : अनंत चतुदशी का त्योहार भगवान विष्णु की पूजा और भगवान गणेश के विसर्जन के लिए बहुत खास माना जाता है। इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ दाहिने हाथ पर 14 गांठों वाला अनंत सूत्र बांधने की पुरानी परंपरा है। माना जाता है कि इस सूत्र में भगवान विष्णु की कृपा बसती है, जो जीवन से सारे दुख, दरिद्रता और परेशानियां दूर कर देती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अनंत सूत्र बांधना सिर्फ एक नियम नहीं है, इसके कुछ कड़े नियम भी होते हैं। अगर आपने पूजा करके इसे अपने हाथ पर बांध लिया है, तो इसके बाद की गई कुछ गलतियां आपकी पूजा का पूरा फल बेकार कर सकती हैं। तो आइए जानते हैं कि अनंत सूत्र बांधने के बाद आपको किन 3 गलतियों से हर हाल में बचना चाहिए:
तामसिक भोजन और नशा से दूरी
अनंत सूत्र हाथ में बांधते ही आपका शरीर एक तरह से भगवान विष्णु के आशीर्वाद से जुड़ जाता है। इसलिए उस दिन और जब तक वह सूत्र आपके हाथ में रहे, अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखें। गलती से भी मांस, मछली, शराब या किसी भी तरह के नशे का सेवन न करें। इसके अलावा पूजा वाले दिन लहसुन और प्याज वाले भोजन से भी परहेज करना चाहिए। माना जाता है कि अनैतिक या तामसिक चीजों का सेवन करने से सूत्र की पवित्रता खत्म हो जाती है और भगवान विष्णु रुष्ट हो सकते हैं।
सूतक या अपवित्र स्थिति में ध्यान न रखना
अनंत सूत्र एक अत्यंत पवित्र धागा है। इसे बांधने के बाद अपनी शारीरिक और मानसिक स्वच्छता बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। यदि परिवार में किसी का जन्म या मरण हो जाए, तो उस स्थिति में इस धागे को तुरंत हाथ में नहीं रखना चाहिए। इसके अलावा, गंदे हाथों से बार-बार धागे को छूना या बिना नहाए-धोए इसे स्पर्श करना सही नहीं माना जाता। अगर यह धागा गलती से अपवित्र हो जाए या कहीं टूट जाए, तो इसे शरीर पर बांधे न रखें। इसे किसी बहती नदी, तालाब या पीपल के पेड़ के नीचे सम्मानपूर्वक प्रवाहित कर देना चाहिए।
मन में कड़वाहट, गुस्सा या किसी का अनादर करना
अनंत पूजा का मतलब सिर्फ धागा बांधना नहीं, बल्कि अपने मन को भी साफ रखना है। भगवान अनंत सत्य और शांति के प्रतीक हैं। धागा बांधने के बाद किसी गरीब, बुजुर्ग या बेसहारा व्यक्ति का अपमान न करें। घर में झगड़ा-झंझट करने, झूठ बोलने या किसी का बुरा चाहने से बचें। शास्त्र कहते हैं कि अगर आपके मन में पाप या कड़वाहट है, तो बाहरी पूजा-पाठ का कोई फल नहीं मिलता। ऐसा करने से घर की बरकत रुक सकती है।
शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ