Bahula Chaturthi 2026 : कब रखा जाएगा बहुला चतुर्थी का व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Edited By Updated: 30 Aug, 2026 08:01 AM

bahula chaturthi 2026

सनातान धर्म में बहुला चतुर्थी का बहुत खास महत्व है। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को बहुला चतुर्थी या बहुला चौथ के नाम से जाना जाता है। यह व्रत संतान की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी माना...

Bahula Chaturthi 2026 : सनातान धर्म में बहुला चतुर्थी का बहुत खास महत्व है। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को बहुला चतुर्थी या बहुला चौथ के नाम से जाना जाता है। यह व्रत संतान की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है। यह व्रत देवों के देव  महादेव के पुत्र गणेश जी को समर्पित है। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से गणेश जी की पूजा करने और व्रत रखने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और मन की हर मुराद पूरी होती है। तो आइए जानते हैं बहुला चतुर्थी के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में-

Bahula Chaturthi 2026

बहुला चतुर्थी डेट और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 31 अगस्त सोमवार के दिन सुबह 8 बजकर 51 मिनट पर होगी और इसका समापन अगले दिन यानी 1 सितंबर मंगलवार को सुबह 7 बजकर 41 मिनट पर होगा। उदया तिथि के हिसाब से बहुला चतुर्थी का व्रत 31 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। चंद्रोदय का समय रात के 8 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। भारत में अलग-अलग स्थानों पर चंद्रोदय का समय अलग हो सकता है।

Bahula Chaturthi 2026

बहुला चतुर्थी पूजा विधि 

बहुला चतुर्थी के व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करें और इसके बाद व्रत का संकल्प लें। 

उसके बाद शाम के समय पूजा स्थान को साफ करें और एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।

चौकी पर भगवान गणेश, श्रीकृष्ण और बहुला गाय व बछड़े की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। 

श्री गणेश को दूर्वा, रोली, अक्षत, मौली और पुष्प चढ़ाएं। बहुला गाय और बछड़े को चंदन का तिलक लगाएं और फूल अर्पित करें।

भगवान गणेश को मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। इसके साथ ही गाय और बछड़े को आटे की लोई, चना दाल और गुड़ का भोग अर्पित करें।

उसके बाद बहुला चतुर्थी व्रत कथा सुने और पढ़ें और साथ में गणेश जी के नामों और मंत्रों का जाप करें। 

अंत में  राते के समय चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को दूध, अक्षत और जल मिलाकर अर्घ्य दें और संतान की उन्नति की प्रार्थना करें।

Bahula Chaturthi 2026

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!