बकरीद से पहले बंगाल में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, गाय को मारना ईद का हिस्सा नहीं

Edited By Updated: 22 May, 2026 10:31 AM

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार के हालिया नोटीफिकेशन में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया, जिसके मुताबिक बैलों, गायों, बछड़ों और भैंसों के वध को सीमित किया जाना है क्योंकि उनको मारना ईद का हिस्सा नहीं है।

कोलकाता (इंट): कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार के हालिया नोटीफिकेशन में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया, जिसके मुताबिक बैलों, गायों, बछड़ों और भैंसों के वध को सीमित किया जाना है क्योंकि उनको मारना ईद का हिस्सा नहीं है। यह फैसला, अगली बकरीद से पहले आया है। जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की एक डिवीजन बैंच ने कहा कि यह अधिसूचना हाईकोर्ट द्वारा पारित पहले के आदेशों के पालन में जारी की गई थी।

बैंच ने कहा कि इस बात पर भी विवाद नहीं है कि 2018 के डब्ल्यू.पी. 328 में समन्वय बैंच द्वारा पारित आदेश को अंतिम रूप दे दिया गया है। अदालत ने यह फैसला, अगले हफ्ते से बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम के तहत जारी किए गए दिशा-निर्देशों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनाया।

नए नियमों के तहत सांड, बैल, गाय, बछड़े और भैंस जैसे बड़े पशुओं के वध के लिए पहले पशु चिकित्सकों से फिटनैस प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होगा। प्रमाण पत्र में यह स्पष्ट करना होगा कि संबंधित पशु अब खेती या माल ढोने के काम के योग्य नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना प्रमाण पत्र के किसी भी पशु का वध नहीं किया जा सकेगा। साथ ही, वध केवल सरकार से मान्यता प्राप्त बूचड़खानों में ही किया जाएगा। सरकार ने अधिकारियों को अवैध वध रोकने और नियमों के पालन की जांच करने के व्यापक अधिकार भी दिए हैं।

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