बांके बिहारी मंदिर: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई

Edited By Updated: 09 Aug, 2025 07:32 AM

banke bihari temple

नई दिल्ली (प.स.): सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को वृंदावन स्थित ऐतिहासिक बांके बिहारी मंदिर पर एक जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेशों पर नाराजगी व्यक्त की और उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ ‘असंयमित भाषा’ के इस्तेमाल पर सवाल उठाया।

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नई दिल्ली (प.स.): सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को वृंदावन स्थित ऐतिहासिक बांके बिहारी मंदिर पर एक जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेशों पर नाराजगी व्यक्त की और उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ ‘असंयमित भाषा’ के इस्तेमाल पर सवाल उठाया। 

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने उच्च न्यायालय की एकल पीठ द्वारा 21 जुलाई और 6 अगस्त को पारित आदेशों का अवलोकन किया, जो उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश, 2025 को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर दिए गए थे और इन आदेशों में की गई टिप्पणियों पर रोक लगा दी।  

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने पीठ को बताया कि उच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर ‘समानांतर कार्रवाई’ की और आदेश में कुछ ‘अनुचित टिप्पणियां’ कीं।  पीठ ने कहा, “उच्च न्यायालय किस तरह की असंयमित भाषा का इस्तेमाल कर रहा है? जैसे राज्य सरकार ने अध्यादेश पारित करके कोई पाप किया हो। यह सब क्या है ? क्या उच्च न्यायालय को यह जानकारी नहीं दी गई कि यह मामला उच्चतम न्यायालय के संज्ञान में है?”

न्यायमूर्ति कांत ने आगे कहा कि किसी कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाएं हमेशा खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध होती हैं, लेकिन वर्तमान मामले में एकल न्यायाधीश ने आदेश पारित किया। पीठ ने 21 जुलाई के आदेश में की गई टिप्पणियों पर रोक लगाने का आदेश दिया था।      

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