Edited By Sarita Thapa,Updated: 26 Aug, 2026 01:54 PM

सनातन धर्म में रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक है। हर साल सावन पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राख बांधती है और भाई उसे उपहार देने के साथ उसकी सदा रक्षा करने का वचन...
Bhadra Kaal Raksha Bandhan Story : सनातन धर्म में रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक है। हर साल सावन पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राख बांधती है और भाई उसे उपहार देने के साथ उसकी सदा रक्षा करने का वचन देता है। ज्योतिष और शास्त्र विधान के अनुसार, रक्षाबंधन पर भद्रा काल का विशेष ध्यान रखा जाता है। शास्त्रों में भद्रा के दौरान राखी बांधना पूरी तरह से वर्जित और अशुभ माना जाता है। कई लोगों के मन में यह सवाल अक्सर बना रहता है कि भद्रा पर राखी बांधने की मनाही क्यों है। तो आइए जानते हैं इसके शूर्पणखा और रावण जुड़ी रोचक कथा के बारे में-
भद्रा काल में राखी बांधना क्यों अशुभ है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भद्रा भगवान सूर्य और माता छाया की पुत्री तथा न्याय के देवता शनिदेव की बहन हैं। भद्रा का स्वभानव बहुत उग्र और विनाशकारी माना गया है। माना जाता है कि जन्म के समय से ही भद्रा शुभ कार्यों जैसे-यज्ञ, पूजा-पाठ और मांगलिक कामों में विघ्र डालती थीं। इसलिए ब्रह्मा जी ने उन्हें पंचांग के एक विशेष काल में स्थन दिया और निर्देश दिया कि उनके समय में कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे। भद्रा में किया गया कोई भी काम सफल नहीं होता और अमंगलकारी सिद्ध होता है।
शूर्पणखा और रावण से जुड़ी पौराणिक कथा
भद्रा काल में राखी न बांधने के पीछे रावण और उसकी बहन शूर्पणखा से जुड़ी कथा भी बहुत प्रचलित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, शूर्पणखा ने अपने भाई रावण की कलाई पर भद्रा काल के समय ही राखी बांधा था। भद्रा का समय बहुत अशुभ होने के कारण इस रक्षासूत्र ने रावण की रक्षा करने के बजाय उसके पतन का मार्ग प्रशस्त किया। इसके बाद ही सीता हरण की घटना हुई और भगवान श्री राम के हाथों रावण का वध हुआ, जिससे उसके पूरे कुल को खत्म कर दिया। इसी घटना के कारण यह माना जाता है कि भद्क काल में बांधी गई राखी भाई के जीवन में संकट, कष्ट और विनाश ला सकती है। यही वजह है कि रक्षाबंधन के दिन भद्रा का समय समाप्त होने के बाद ही शुभ मुहूर्त देखकर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं।

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